न्यूज़लिंक हिंदी। आजाद भारत में लगभग 6 दशक बाद ऐसा होने जा रहा है जब देश का प्रधानमंत्री लगातार 11वीं बार लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करने वाला है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को 78वें स्वतंत्रता दिवस पर ये कीर्तिमान बनाने जा रहे हैं और एक बार फिर वह भारत को विकसित बनाने के अपने संकल्प के बारे में बात करने वाले हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आज भारत इतनी बड़ी आर्थिक शक्ति कैसे बना है? अंग्रेजों से आजाद होने के बाद 1947 से अब तक देश की इकोनॉमी कैसे बदली है।
ये बात आपने कहीं ना कहीं जरूर सुनी या पढ़ी होगी कि अंग्रेजों ने भारत का कितना शोषण किया था। जब देश आजाद हुआ था, तो उसकी हालत खस्ता थी। ऐसे में तब देश के पहले प्रधानमंत्री बने पंडित जवाहर लाल नेहरू के सामने भारत को एक देश के तौर पर दोबारा खड़े करने की पूर्ण चुनौती थी। देश की अर्थव्यवस्था को नए सिरे से बनाना था।
आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को देश की इकोनॉमी को उस दौर में दोबारा खड़ा करना था, जब दुनिया पूंजीवाद और साम्यवाद के दो धड़ों में बंटी थी और शीत युद्ध लड़ रही थी। ऐसे में भारत जैसे बड़े देश के लिए उन्होंने खुद का आर्थिक मॉडल बनाया और मिश्रित अर्थव्यवस्था को मुख्य रूप से चुना।
पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने सरकार के खर्च पर बड़े-बड़े कॉरपोरेशन, पेट्रोलियम और स्टील कंपनियां बनाईं, वहीं बड़े-बड़े रिसर्च और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट भी खड़े किए। प्राइवेट सेक्टर को भी सरकार की निगरानी में काम करने की छूट दी गई और सभी को पंचवर्षीय योजना के लक्ष्यों के साथ राष्ट्र निर्माण के धागे में पिरोया गया।
भारत आज भले दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है, लेकिन आजादी के समय भी भारत की आबादी कम नहीं थी। इतनी बड़ी आबादी का पेट दूसरे देश से खाद्यान्न को आयात करके नहीं किया जा सकता। इसलिए भारत को अपनी ‘आत्मनिर्भर’ फूड सिक्योरिटी चाहिए थी। ये भारत की इकोनॉमी के लिए जरूरी भी था।
इसलिए 1965 के दौर में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में भारत ने ‘हरित क्रांति’ शुरू की, इसी की बदौलत आज सरकार देश में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज बांट पा रही है। इसने देश की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा बचाने में मदद की, नहीं तो 140 करोड़ की आबादी का पेट भरने के लिए भारत को एक बड़ी राशि खाद्यान्न के आयात पर निर्भर करनी पड़ती, जबकि आज हम दुनिया को गेहूं और चावल का मुख्य एक्सपोर्ट करते हैं।
आजादी के बाद से अब तक भारत की इकोनॉमी के बदलने की बात हो और पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल का जिक्र बिल्कुल ना हो, ये बिल्कुल भी संभव ही नहीं। भारत को नेहरू युग से निकालकर आधुनिक दुनिया में लाने का श्रेय उनकी और उनकी सरकार के वित्त मंत्री मनमोहन सिंह को ही दिया जाता है।
सरकार ने तब लाइसेंस और इंस्पेक्टर राज खत्म करके देश में सबसे बड़ा आर्थिक सुधार ‘LPG’ लाया था, उनके इस बदलाव ने ही भारत की आर्थिक ताकत को भी मजबूत किया। इसके बाद देश में प्राइवेट सेक्टर का तेजी से उभार हुआ। विदेशी निवेश आना भी शुरू हुआ। भारत ने दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करना शुरू किया और देश ने तरक्की की नई इबारत भी लिखी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को भी देश की इकोनॉमी के लिहाज से जरूर से जरूर देखा जाना चाहिए, ये उनका ही कार्यकाल है जब देश में एक्सप्रेस-वे जैसी कल्पना को मूर्त रूप में मिला है। बुलेट ट्रेन पर काम हुआ है। भारत में स्टार्टअप की एक नई क्रांति शुरू हुई है और सरकार ने स्वरोजगार को ज्यादा बढ़ावा दिया है।

