कानपुरकी गंगा नदी में डॉल्फिन होने के प्रमाण पहले भी मिले हैं, लेकिन इस बार डॉल्फिन सामने भी आई लेकिन, मृत अवस्था में। लेकिन यह डॉल्फिन कैसे मरी इसका जवाब किसी के पास नहीं है। लेकिन, मरी डॉल्फिन के मिलने के बाद से गंगा की सफाई पर सवाल खड़े हो गए है। कानपुर से फतेहपुर तक गंगा का पानी जहरीला है। इसकी वजह से यहां जलीय जीव जंतुओं पर संकट मंडरा रहा है। क्यों कि डॉल्फिल स्वच्छ पानी में ही पाई जाती हैं, ऐसे में पूरा अंदेशा है कि जैसे ही यह डॉल्फिन कानपुर के जहरीले पानी के संपर्क में आई तो इसका दम घुट गया।
दरअसल शुक्रवार देर शाम एक डाल्फिन कानपुर के जाजमऊ स्थित गंगा पुल के नीचे मिली। यह बड़ी मछली कहीं से बहकर यहां आ गई।मछुआरों की सूचना पर जाजमऊ पुलिस ने उसे नाविकों की मदद से बाहर निकलवाया। जानकारी पाकर पहुंची वन विभाग टीम ने उसे कब्जे लिया, अधिकारियों ने पुख्ता किया कि यह कोई आम नहीं बल्कि डाल्फिन मछली है। जो कहीं से बहकर यहां आ पहुंची। अनुमान लगाया जा रहा है कि गंगा में प्रदूषण के कारण इसकी मौत हुई है। शनिवार को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा।
थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने वन विभाग के रेंजर राकेश पांडेय को मछली सुपुर्द कर दी गई है। उन्होंने बताया कि यह शव करीब दो से तीन दिन पुराना लग रहा है। मछली की लंबाई करीब 10 फीट और वजन साढ़े तीन सौ किलो के आसपास होने का अनुमान है।