इशारों पर कभी हंसती, तो कभी खेलती 5 साल की मासूम, दुनिया में पहली बार बिना बेहोश किए की गई ब्रेन की सर्जरी

एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने एक बार फिर बड़ा कारनामा कर दिखाया है। यहां के डॉक्टरों ने पांच साल की एक बच्ची के ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी उसे होश में रखते हुए की है।

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न्यूज़लिंक हिंदी। एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने एक बार फिर बड़ा कारनामा कर दिखाया है। यहां के डॉक्टरों ने पांच साल की एक बच्ची के ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी उसे होश में रखते हुए की है। एम्स का दावा है कि यह अक्षिता नाम की यह लड़की इस तरह से ब्रेन ट्यूमर के सफल ऑपरेशन से गुजरने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की मरीज है। बच्ची अब पूरी तरह से ठीक है और सोमवार (8 जनवरी) को उसे घर भेज दिया जाएगा।

हाथों के इशारों पर कभी हंसती, तो कभी खेलती रही। इस दौरान सर्जरी टेबल पर 5 साल 10 महीने की बच्ची के चार घंटे कब निकल गए, उसे पता भी नहीं चला। इस चार घंटे के दौरान डॉक्टरों ने बिना बेहोश किए बच्ची की सर्जरी कर सिर से ट्यूमर निकाला। यह अपने आप में अनोखा मामला है। अभी तक बच्चों की सर्जरी बेहोश कर के की जाती थी। यह पहली बार है जब एम्स में बच्ची को बिना बेहोश किए सर्जरी की गई है।

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बच्ची ने किया पूरा सहयोग
डॉक्टरों का कहना है कि इस ऑपरेशन प्रक्रिया के दौरान बच्ची ने बहुत सहयोग किया। बच्ची पूरी सर्जरी के दौरान मुस्कुराती रही। डॉक्टर की टीम उससे बात भी करती रही। वह लेटे-लेटे कई तरह की एक्टिविटी में भी बिजी रही। सर्जरी से पहले उसे सामान्य वस्तुएं, सामान्य जानवर दिखाए गए और भाषा और सेंसरिमोटर मूल्यांकन के लिए कुछ टास्क दिए गए, जिन्हें सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान भी दोहराया गया। बच्ची पहली कक्षा की छात्रा है। सर्जरी के दौरान उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी फौरन पहचान ली। उसे फोन में फोटो और वीडियो भी दिखाए गए।

इस तरह की गई सर्जरी
न्यूरोसर्जरी के प्रोफेसर डॉ. दीपक गुप्ता का कहना है कि, “ब्रेन ट्यूमर के लिए अवेक सर्जरी आमतौर पर ज्यादा से ज्यादा ट्यूमर को हटाने और न्यूरोलॉजिकल नुकसान को कम करने के लिए की जाती है। अवेक क्रैनियोटॉमी के दौरान मरीजों को न्यूनतम स्तर का दर्द महसूस होता है। इसमें मरीज न्यूरोलॉजिकल परीक्षणों में पूरी तरह से सहयोग करने में सक्षम होता है। इस विधि को अवेक क्रैनियोटॉमी कहा जाता है। इस तरीके में सामान्य एनेस्थीसिया के तहत अन्य ऑपरेशनों की तुलना में सर्जिकल और एनेस्थीसिया टीमों के बीच अधिक सहयोग की जरूरत होती है।”

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ट्यूमर निकालने के लिए बनाई एक टीम
उक्त सर्जरी के बाद ट्यूमर का कुछ हिस्सा सिर में रह गया था जिसे निकालना जरूरी था। बच्ची की हालत को देखते हुए एम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ। दीपक गुप्ता, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ। मिहिर पांड्या सहित सात डॉक्टरों की एक टीम बनी। टीम ने पूरे मामले को लेकर रणनीति तैयार की और निर्णय लिया कि बच्ची को बिना बेहोश किए सर्जरी की जाएगी। यह चुनौती भरा निर्णय था।

चुनौती भरा था मामला
डॉक्टरों का कहना है कि काफी कम उम्र की बच्ची के सिर की सर्जरी काफी चुनौती भरा मामला रहा। इस मामले में एक छोटी सी गलती बच्ची की जान ले सकती थी। यहीं कारण है कि सर्जरी के दौरान डॉक्टरों की टीम ने एक मिनट की निगरानी की। सर्जरी के हर पल पर उसके शरीर में होने वाले बदलाव व हरकत पर नजर रखी गई। इस सर्जरी में यह अच्छा रहा कि इस दौरान कभी भी ऐसा नहीं हुआ जब बच्ची के व्यवहार में कोई बदलाव दिखा हो।

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