न्यूज़ लिंक हिंदी। गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 भारत को कश्मीर से जोड़ता नहीं, बल्कि जोड़ने से रोकता है। यदि नेहरू ने सेना को नहीं रोका होता तो पीओके हमारा होता।
हमने पीओके पर दावा छोड़ा नहीं है। गृह मंत्री ने कांग्रेस के अधीर रंजन और मनीष तिवारी के सवालों का जवाब देते हुए कहा, कश्मीर का मसला यूएन तक नेहरू की वजह से ही पहुंचा। पाक सेना ने जब अतिक्रमण किया तो हमारी सेना आगे बढ़ रही थी लेकिन नेहरू ने यदि सेना को रोका नहीं होता तो पीओके भी हमारा हिस्सा होता।
असदउद्दीन औवैसी के आरोपों का जवाब देते हुए शाह ने कहा, 370 खत्म करना ऐतिहासिक भूल नहीं बल्कि भूल सुधार है। 370 से क्या फायदा है, किसी ने नहीं बताया लेकिन 370 लोकतंत्र में बाधा है, गरीबी बढ़ाता है, विकास-पर्यटन को रोकता है, शिक्षा से दूर करता है, महिला, आदिवासी, दलित विरोधी है और आतंकवाद को खाद-पानी देता है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छाशक्ति से हमने इसे खत्म किया।
370 की वजह से बाल विवाह नियंत्रण कानून कश्मीर में नहीं लागू हो पाया। 370 की वजह से देश का कानून-संविधान जम्मू कश्मीर में लागू नहीं हो पाया। अब सभी कानून लागू होंगे। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों से गृह मंत्री ने सवाल किया, तब आपको कुछ गलत नजर नहीं आया जब नेहरू और इंदिरा ने दो संशोधन किए।
बिना चर्चा जब आंध्र का विभाजन हुआ तब भी गलत नजर नहीं आया। काला दिन आज नहीं है, काला दिन तब था, जब 1975 में आपातकाल लागू कर इंदिरा ने पूरे देश को केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) बना दिया गया था।
बहस के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूख अब्दुल्ला को नजरबंद किया गया है। इस पर शाह ने कहा, मैं रिकॉर्ड के तौर पर कहा रहा हूं कि फारूक को नजरबंद नहीं किया गया है, वह अपने घर पर हैं।
अगर वह खुद संसद नहीं आना चाहते तो उनकी कनपटी पर बंदूक रखकर उनको संसद नहीं लाया जा सकता। शाह ने सदन में चौथी बार इस संदभ में बोलते हुए शाह ने कहा, मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि अब्दुल्ला साहब को नजरबंद नहीं किया गया है। वह अपनी मर्जी से अपने घर पर हैं।
अगर उनकी तयत खराब होती तो वह बाहर नहीं आते। मैं डॉक्टर नहीं हूं। दरअसल, कश्मीर घाटी में सोमवार को बदले घटनाक्रम के बाद देर शाम पूर्व सीएम और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती, पूर्व सीएम एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन और इमरान अंसारी को हिरासत में ले लिया गया था। जिसके बाद से कयास लग रहे थे कि फारूक को भी घर में नजरबंद किया गया है।

