न्यूजलिंक हिंदी,मथुरा। उत्तर भारत के विशालतम दक्षिण भारतीय शैली के श्री रंगनाथ मंदिर में प्रसिद्ध बैकुंठ उत्सव 23 दिसंबर को मनाया जा रहा है। प्रातः कालीन बेला में मनाए जाने वाले इस उत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए मंदिर प्रबंधन जुटा हुआ है। 23 दिसंबर को प्रसिद्ध बैकुंठ उत्सव परंपरा अनुसार प्रातः कालीन बेला में मनाया जायेगा।
इस दौरान प्रातः के समय वर्ष में एक बार खुलने वाले बैकुंठ दरवाजा से भगवान श्री गोदा रंगमन्नार आलवार संतों और भक्तों को दर्शन देने के लिए निकलते हैं। इस अद्भुत दर्शन करने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। उत्सव से पहले बैकुंठ द्वारा को सजाया संवारा जा रहा है। इसके साथ ही बैकुंठ द्वार के बाहर बल्ली आदि लगाकर मंडप बनाया गया है। इसके साथ ही आलवार संतों को विराजमान करने के लिए बैकुंठ द्वार के समक्ष स्थान बनाया गया है। बैकुंठ द्वार के साथ साथ पौंड़ा नाथ मंदिर में भी तैयारी की जा रही है। यहां भगवान बैकुंठ द्वार से निकलकर मंदिर की परिक्रमा करने के बाद भगवान विराजमान किए जाते हैं। कहा जाता है कि यह स्थान भगवान का बैकुंठ लोक है। इस मंदिर में विराजमान भगवान के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु ललाइत नजर आते हैं। बैकुंठ एकादशी के अवसर पर खुलने वाले बैकुंठ द्वार से निकलने और भगवान के दर्शन के लिए मंदिर प्रबंधन ने व्यवस्था की है।
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मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि श्रद्धालुओं को पश्चिम द्वार से प्रवेश कराया जायेगा। पश्चिम द्वार से प्रवेश करने के बाद श्रद्धालु पुस्कर्णी द्वार पर पहुंचेंगे। यहां से घंटाघर होते हुए भक्त वेंकटेश बालाजी होते हुए रामानुज जी की समाधि पर पहुंचेंगे। यहां श्रद्धालुओं को कुछ देर रोका जाएगा।
इस दौरान बैकुंठ द्वार पर भगवान के समक्ष मंदिर के पुजारी दिव्य प्रबंध का पाठ करेंगे। करीब आधा घंटे तक पाठ करने के बाद भगवान की सवारी शेषशाई विष्णु जी के मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी। इसके बाद श्रद्धालुओं को बैकुंठ द्वार के लिए भेजा जाएगा।

