अखिलेश यादव की चेतावनी को ठेंगा दिखा रहे स्वामी प्रसाद मौर्य? अयोध्या गोलीकांड पर दिया बड़ा बयान

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कासगंज में कहा कि कारसेवकों पर तत्कालीन सरकार ने संविधान और कानून की रक्षा के लिए अराजक तत्वों पर देखते ही गोली मारने के आदेश दिए थे।

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न्यूज़लिंक हिंदी। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कासगंज में कहा कि कारसेवकों पर तत्कालीन सरकार ने संविधान और कानून की रक्षा के लिए अराजक तत्वों पर देखते ही गोली मारने के आदेश दिए थे। उस समय तत्कालीन सरकार ने अपना कर्तव्य निभाया था।

दरअसल, समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य मंगलवार को बौद्ध एकता समिति की ओर से गनेशपुर में आयोजित बौद्ध जन जागरूकता सम्मेलन में मौजूद लोगों को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिस समय कारसेवकों पर गोली चलवाने का आदेश जारी किया गया था, उस समय तत्कालीन सरकार अपने फर्ज को निभा रही थी। वह अपने कर्तव्य का पालन कर रही थी।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, ‘जिस समय अयोध्या में राम मंदिर पर घटना घटी थी। बिना किसी न्यायालय के आदेश और बिना किसी प्रशासनिक आदेश के बड़े पैमाने पर अराजक तत्वों ने तोड़फोड़ की थी। तब तत्कालिन सरकार ने संविधान की रक्षा के लिए, कानून की रक्षा के लिए और अमन चैन कायम रखने के लिए उस समय जो गोली चलवाई थी। वो सरकार का अपना कर्तव्य था। सरकार ने अपना कर्तव्य निभाया था और एसपी सिंह बघेल भी उस वक्त सपा में थे।’

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हिंदू धर्म एक धोखा- सपा नेता
दरअसल, सपा नेता ने इससे पहले कहा था, ‘हिंदू धर्म एक धोखा है। वैसे भी 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिंदू कोई धर्म नहीं है। यह जीवन जीने की एक शैली है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी दो बार कह चुके हैं कि हिंदू नाम का कोई धर्म नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक कला है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा है कि हिंदू धर्म कोई धर्म नहीं है।’

इससे पहले भी वह हिंदू धर्म पर विवादित बयान दे चुके हैं। मां लक्ष्मी और रामचरितमानस पर दिए गए बयान को लेकर भी चर्चा में आए थे। इसपर अखिलेश यादव ने मंगलवार को प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि सब ब्राह्मण स्वामी की शिकायत किए हैं। नरेश उत्तम पटेल से बोला है कि उसको मना करो अब ऐसा कुछ ना बोलो और नेताओं को भी निर्देश दो। सोशल मीडिया पर लिखना है तो तार्किक लिखो वरना मत लिखो।

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गोली लगने से पांच की हुई थी मौत
30 अक्तूबर, 1990 को पहली बार कारसेवकों पर गोलियों चलीं। गोली लगने से पांच की मौत हो गई थी। इसके बाद से अयोध्या से देशभर का माहौल गर्मा गया था। गोलीकांड के दो दिन बाद ही दो नवंबर को हजारों कारसेवक हनुमान गढ़ी के पास पहुंच गए। इस घटना के दो साल बाद छह दिसंबर, 1992 में विवादित ढांचे को गिरा दिया गया। सन् 1990 में हुए गोलीकांड के 23 साल बाद जुलाई 2013 में मुलायम सिंह ने एक बयान दिया था, इस बयान में उन्होंने कहा था कि उन्हें गोली चलवाने का अफसोस है, लेकिन उनके पास अन्य कोई विकल्प मौजूद नहीं था।

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