न्यूज़लिंक हिंदी, वाराणसी। काशी विश्वनाथ महादेव के शुभ दर्शन के लिए भले ही आम भक्तों को लंबी कतारे लगानी पड़ती है। आपको बता दे कि जुगाड़ के दम पर बीते एक साल में 1.70 लाख सामान्य भक्तों ने वीआईपी दर्शन किए हैं। हालांकि इनमे 50 हजार से ज्यादा भक्त ऐसे हैं, जिन्होंने बिना प्रोटोकॉल पर्ची के बाबा के स्पर्श दर्शन किए हैं। प्रोटोकॉल व्यवस्था की जांच में हुए खुलासे के बाद मंदिर प्रशासन सुरक्षा के लिए बनाई हाई पॉवर कमेटी के नियमों के अनुसार ही सुगम दर्शन की व्यवस्था को लागू करने में जुट गया है।
भव्य और दिव्य धाम काशी विश्वनाथ के बनने के बाद देश और दुनिया भर के भक्त काशी आ रहे हैं। बीते दो वर्षों में ही 13 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसमें वीआईपी के लिए सुगम दर्शन की तर्ज पर ही प्रोटोकॉल व्यवस्था के तहत दर्शन पूजन का लाभ दिया जा रहा है। मंदिर में लागू एकीकृत प्रोटोकॉल व्यवस्था में अलग-अलग सरकारी विभागों के कर्मचारियों व अधिकारियों ने सेंधमारी कर आम भक्तों को भी वीआईपी बनवा दिया। मंदिर प्रशासन की जांच में प्रतिमाह करीब 15 हजार वीआईपी ऐसे मिले, जिन्हें बिना कारण ही प्रोटोकॉल दिया गया।
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वीआईपी के लिए प्रोटोकॉल व्यवस्था भी लागू
मंदिर प्रशासन की ओर से सुगम दर्शन की व्यवस्था लागू की है। इसमें 300 रुपये के शुल्क पर एक शास्त्री के साथ बाबा के दर्शन की सुविधा है। इसी तर्ज पर वीआईपी के लिए प्रोटोकॉल व्यवस्था भी लागू है, इसमें सक्षम अधिकारी भक्तों को सुगम दर्शन का लाभ निशुल्क प्रदान करते हैं। यहां बता दें कि नए वर्ष के पहले दिन 5.90 लाख भक्तों ने दर्शन कर नया रिकॉर्ड बनाया था।
जानकारी के लिए बता दे कि मंदिर की प्रबंध समिति से जुड़े कई ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो अपना मूल काम छोड़कर मंदिर में ही पूरा समय बिता रहे हैं। करीब एक साल पहले प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों को पत्र जारी कर मंदिर में समय बिताने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को चेतावनी जारी करने के लिए कहा था। थोड़े समय तक व्यवस्था में सुधार रहा, मगर समय बीतने के साथ ही फिर से सरकारी विभागों से जुड़े लोग मूल काम छोड़कर मंदिर में ही समय बिता रहे हैं। प्रशासन ने सभी विभागों को दोबारा पत्र जारी किया है।
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प्रोटोकॉल व्यवस्था के लिए प्रशासन, पुलिस और सीआईएसएफ की संयुक्त टीम गठित है। इसकी समीक्षा कराई गई है। बड़ी संख्या में प्रोटोकॉल के तहत अयोग्य लोगों के दर्शन पूजन का मामला सामने आया है। इसके बाद से ही प्रोटोकॉल की नई व्यवस्था लागू की गई है। -कौशल राज शर्मा, मंडलायुक्त
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