न्यूज़लिंक हिंदी। सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के संबंध में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मस्जिद का निरीक्षण करने के लिए आयुक्त ( कोर्ट कमिश्नर) नियुक्त करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। हालांकि, कोर्ट ने कहा है कि अदालत मामले की सुनवाई जारी रखे। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी की तरफ से दायर की गई एक विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 दिसंबर के आदेश पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू पक्ष की दलीलों पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट मामले में मेटनबिल्टी पर सुनवाई कर सकता है, लेकिन कमिश्नर की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट के जज आगे नहीं बढ़ेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान हिंदू पक्ष की दलीलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपकी अर्जी बहुत अस्पष्ट है। आपको स्पष्ट रूप से बताना होगा कि आप क्या चाहते हैं। इसके अलावा ट्रांसफर का मामला भी इस न्यायालय में लंबित है। हमें उस पर भी फैसला लेना है।
शीर्ष अदालत ने कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति के खिलाफ दाखिल मुस्लिम पक्ष की याचिका पर हिन्दू पक्ष को नोटिस जारी किया है। इस मामले पर अब 23 जनवरी को अगली सुनवाई होगी। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर को शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वेक्षण के लिए एक कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति पर सहमति दी थी। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि उस मस्जिद में हिन्दू प्रतीक चिह्न हैं, जिससे पता चलता है कि वह कभी हिंदू मंदिर था।
क्या है श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद
यह पूरा विवाद 13.37 एकड़ जमीन को लेकर है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मथुरा के कटरा केशव देव इलाके में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। उस जगह पर मंदिर बना था। कई हिंदुओं का दावा है कि मुगल काल में औरंगजेब के शासन में मंदिर के एक हिस्से को तोड़कर उस पर मस्जिद बनाई गई, जिसे ईदगाह मस्जिद के नाम से जाना जाता है। हालांकि मुसलमान पक्ष मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की बात से इनकार करता है। साल 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया गया था। हालांकि हिंदू पक्ष उस समझौते को अवैध बताकर खारिज कर रहा है।

