भरतपुर के रहस्यमयी शिव मंदिर की कहानी भूतों ने बनाया मंदिर,जानिए इसके बारे में

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न्यूज़लिंक हिंदी। भूत प्रेत के होने या ना होने को लेकर कई तरह के तर्क होते  हैं, कोई इन्हें मानता है तो किसी को इन पर जरा भी विश्वास नहीं करता है। लेकिन हमारे आसपास कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें देखने के बाद अपनी आंखों पर यकीन कर पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

आज हम आपको जिस जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, ऐसा मानना है कि उसे भूतों ने ही बनाया है। आप सोच रहे होंगे ऐसी कौन सी जगह है। लेकिन इस जगह को लेकर जो जनश्रुतियां हैं वो किसी को भी पूर्ण रूप से अंचभित कर सकती हैं।

इस मंदिर में पूजा करने वाले पुजारी का कहना है ,भगवान भोलेनाथ ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें भूत पिशाच भी अपना आराध्य मानते हैं। जिनमें जीवन हैं और जो निर्जीव होकर किसी और रूप में विद्यमान हैं वो भी शिव की साधना करते हैं। शिव के कई गण हैं जो भोलेनाथ की साधना में लीन रहते हैं।  जिस शिव मंदिर का निर्माण घघरा ग्राम पंचायत में हुआ उसे भूतों ने ही एक रात में बनाया।

एक रात में महादेव के गण भूतों ने मंदिर स्थापित किया, बिना सीमेंट, बिना मसाला के यह मंदिर पूर्ण रूप से स्थापित किया गया है।  मंदिर में एक के ऊपर एक पत्थर लगे हुए हैं।  मंदिर के अंदर एक छोटे से पत्थर को रखा गया है। उसे छोटे से पत्थर ने हीं पूरे मंदिर को संभाला है। सैंकड़ों वर्षों से ये मंदिर अपनी मूल स्थिति में है। इसलिए इस मंदिर को अनोखे स्वरूप के कारण भूतनाथ मंदिर कहा जाता है।

गांव के सरपंच ने इस मंदिर के बारे में बताया कि ये मंदिर बहुत पुराना है, पुराने जमाने से बना हुआ है। आज तक कोई भी इस मंदिर का रहस्य नहीं जान पाया कि मंदिर को किसने बनाया।  ऐसा प्रतीत होता है कि इस मंदिर को भगवान श्री विश्वकर्मा जी ने बनाया है।  हम शासन से मांग करते हैं कि मंदिर को एक धरोहर के रूप में ही रखा जाए।

वहीं इस मंदिर को लेकर दूसरी धारणा यह भी है।  बताया जाता है कि 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान श्रीराम का जब छत्तीसगढ़ में प्रवेश हुआ तो उन्होंने घघरा में शिवलिंग बनाकर उसे स्थापित भी किया। ये प्राचीन शिव मंदिर राम वन गमन पथ सीतामढ़ी हरचौका से 40 किलोमीटर दूर है।

गांववालों की मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ 1 रात और 2 दिन रुके भी थे।  राम ने यहां पर तीन शिवलिंग की स्थापना की थी। जो आज भी पूर्ण रूप से  विद्यमान है।

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