न्यूज़लिंक हिंदी। छह साल की उम्र से सरफराज खान ने अपनी क्रिकेट यात्रा की शुरुआत की थी। शुरू से ही वह अपने पिता के सामने एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने का सपना देखते थे। आखिरकार भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले 311वें खिलाड़ी बन गए।
बता दे कि राजकोट में इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय प्लेइंग इलेवन में शामिल हुए सरफराज खान को महान क्रिकेटर अनिल कुंबले ने टेस्ट कैप पहनाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्वागत किया तो उनके पिता नौशाद खान भावुक हो उठे।
सगड़ी क्षेत्र के बासूपार निवासी सरफराज लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर रहे थे और टीम इंडिया में आने के लिए उनकी प्रबल दावेदारी थी पर समय लग रहा था। आखिरकार 15 फरवरी का दिन आया तो उनके पिता का सपना सच हो गया। वहीं, आजमगढ़ वासियों में हर्ष की लहर व्याप्त है। लोगों ने जश्न मनाया और खुशी में मिठाइयां बांटी।
भारतीय टीम के लिए खेलना मेरा सपना -सरफराज
सरफराज ने पहले दिन का खेल समाप्त होने के बाद मीडिया से कहा- पहली बार मैदान पर आकर और अपने पिता के सामने कैप लिया। मैं छह साल का था जब उन्होंने मेरी क्रिकेट शुरू की। उनके सामने भारतीय टीम के लिए खेलना मेरा सपना था।
जडेजा ने मेरा काफी समर्थन किया -सरफराज
अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पारी में सरफराज कप्तान रोहित शर्मा के आउट होने बाद विकेट पर आए और शानदार बल्लेबाजी करते हुए 62 रन बना लिए थे, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गए। इस पर उन्होंने कहा- यह खेल का हिस्सा है। क्रिकेट में गलत संचार होता है। कभी रन आउट हो जाते हैं, कभी रन बन जाते हैं। मैंने लंच के समय जडेजा से बात की और उनसे कहा कि वह खेलते समय मुझसे बात करते रहें।
मुझे खेलते समय बात करना पसंद है। यह मेरा पहली बार था। मैंने उनसे कहा कि जब मैं बल्लेबाजी के लिए जाता हूं तो खेलते समय मुझसे बात करते रहो। जब मैं बल्लेबाजी कर रहा था तो वह बात करते रहे और मेरा काफी समर्थन किया।
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