Ajmer: ख्वाजा की दरगाह पर हिंदू मंदिर होने का फिर दावा, ज्ञानवापी की तरह होगा ASI सर्वे?

ख्वाजा की दरगाह के पहले मंदिर होने का फिर दावा किया गया है। बता दे कि ‘महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष’ ने इसके लिए पत्र भी लिखा था। महाराणा प्रताप सेना का कहना है कि ये दरगाह हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाया गया है, जिसकी ASI सर्वे बहुत जरूरी है।

0
221

न्यूज़लिंक हिंदी, राजस्थान। अजमेर में स्थित ख्वाजा की दरगाह के पहले मंदिर होने का फिर दावा किया गया है। बता दे कि ‘महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष’ ने इसके लिए पत्र भी लिखा था। महाराणा प्रताप सेना का कहना है कि ये दरगाह हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाया गया है, जिसकी ASI सर्वे बहुत जरूरी है।

कुछ महीनों पहले संगठन के अध्यक्ष ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी जाँच की माँग की थी और यही माँग हमने मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से भी की है। साथ ही कलेक्टर को ज्ञापन देकर शीघ्र सर्वे करवाने की मांग की है।

मुस्लिम आक्रांतों ने ध्वस्त कर दिया था
महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष राज्यव‌र्द्धन सिंह परमार ने कहा कि ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह पहले हिंदू मंदिर था, जिसे मुस्लिम आक्रांतों ने ध्वस्त कर दिया था। शिव मंदिर और अन्य मृर्तियों के स्थान पर दरगाह बनाई गई है। दरगाह के दरवाजों पर अब भी स्वास्तिक बने हुए हैं। स्वास्तिक हिंदू होने का प्रतिक है।

दरगाह का मुगलों से कोई संबंध नहीं
हालांकि अब इस मामले में दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन के पुत्र सैयद नसीरूद्दीन चिश्ती ने बुधवार को दरगाह पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है। नसीरूद्दीन ने यह भी कहा कि दरगाह का मुगलों से कोई संबंध नहीं है।

पुलिस ने इस मामले की करेगी जांच
वहीं, दरगाह के खादिम शकील अब्बासी ने अजमेर के क्लॉक टावर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाकर धार्मिक भावनाएं भड़काने के प्रयासों पर रोक लगाने की मांग की है। पुलिस ने इस मामले में जांच करने की बात कही है।अल्पसंख्यक आयोग तक पहुंचा मामलायह मामला अल्पसंख्यक आयोग तक पहुंच गया है। बता दे की आयोग ने अजमेर जिला प्रशासन से एक सप्ताह में प्रकरण को लेकर रिपोर्ट मांगी हैं।

ये भी पढ़ें : UP: योगी सरकार ने पुलिसकर्मियों को दी बड़ी सौगात, 144 परियोजनाओं का किया लोकार्पण

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here