न्यूज़लिंक हिंदी, असम। प्रदेश में केंद्र सरकार की CAA लागू होने से खूब आलोचना हो रही है। अखिल असम छात्र संघ और 30 स्वदेशी संगठनों ने बीते कल यानी सोमवार को गुवाहाटी, बारपेटा, लखीमपुर, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़ और तेजपुर सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में विवादास्पद कानून सीएए की प्रतियां जलाई। इसके साथ ही असम में 16 दलों के संयुक्त विपक्ष ने चरणबद्ध आंदोलन के तहत मंगलवार को राज्यव्यापी हड़ताल की घोषणा की है।
बता दे कि पुलिस ने सीएए के विरोध में असम में हड़ताल का आह्वान करने वाले राजनीतिक दलों को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में कहा गया है, ‘आपके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी और सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान की कुल लागत आपसे और आपके संगठन से वसूली जाएगी।
Guwahati police gave a legal notice to the Political parties who have called for a 'Sarbatmak Hartal' in Assam to protest against the CAA.
"Any damage to public/ private property including Railway and National Highway properties or injury to any citizen caused due to 'Sarbatmak… pic.twitter.com/vnO6uin76t
— ANI (@ANI) March 12, 2024
अखिल असम छात्र संघ ने केंद्र सरकार के नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को अधिसूचित किए जाने के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने का एलान किया है। मुख्य सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने कहा कि हमने प्रत्येक जिले में सीएए की प्रतियां जलाने का फैसला किया है। मंगलवार को नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन (एनईएसओ) की ओर से क्षेत्र के सभी राज्यों की राजधानियों में सीएए की प्रतियां जलाई जाएंगी।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अनुसार, अधिनियम के कार्यान्वयन के बाद अतिरिक्त पुलिस कर्मियों की तैनाती के साथ राज्य भर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों को अलर्ट पर रखा गया है, जबकि लगभग सभी कस्बों में प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं, जहां दिसंबर 2019 में अधिनियम के पारित होने के दौरान व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ था। आसू के सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने कहा, ‘हम सीएए के खिलाफ अपना अहिंसक, शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखेंगे। साथ ही हम अपनी कानूनी लड़ाई भी जारी रखेंगे।’
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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि सड़कों पर विरोध प्रदर्शन का कोई फायदा नहीं होगा क्यों कि यह पहले से ही संसद की ओर से पारित कानून है। उन्होंने सीएए का विरोध करने वालों से कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपनी लड़ाई लड़नी चाहिए।मुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि अगर राजनीतिक दल बंद का आह्वान करते हैं तो वे रजिस्ट्रेशन खो सकते हैं क्योंकि गौहाटी हाई कोर्ट ने पहले बंद पर रोक लगाने का आदेश पारित किया था।
सीएए नियम जारी होने के साथ ही अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना शुरू कर देगी।

