न्यूज़लिंक हिंदी। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के नगारा गांव में 20 मई को अचानक एक कुएं का गंदा पानी पीने से 50 से अधिक लोग जहां उलटी दस्त से बीमार हो गए थे। वहीं इस घटना क्रम में एक बच्चे को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा था। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुएं का सैंपल लिया गया था और यह सैंपल पीएचई विभाग को सौंपा गया था जिसकी रिपोर्ट सामने आई है।
इस रिपोर्ट पर टीकमगढ़ जिले के जिला स्वास्थ्य अधिकारी पीके माहोर ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पीएचई विभाग द्वारा जो रिपोर्ट मुख्य रूप से सौंपी गई है। उसमें पानी को सही बताया गया है। टीकमगढ़ जिला मुख्यालय पर बैक्टीरिया रिपोर्ट की जांच नहीं हो पाती है। स्वास्थ्य अधिकारी ने आगे कहा कि कुएं के पानी पीने से एक बच्चे की मौत हुई थी।
साथ ही 50 से अधिक लोग बीमार थे। उन्होंने कहा कि अभी भी टीकमगढ़ जिला चिकित्सालय में 26 लोग भर्ती हैं। उन लोगों का इलाज किया जा रहा है। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार निगरानी रख रही है। उन्होंने कहा कि बच्चे की मौत निश्चित ही कुएं का गंदा पानी पीने से हुई है।
पीएचई विभाग के अधिकारी अनिल ने गुरुवार की सुबह जानकारी देते हुए बताया कि जिस कुएं का पानी पीने से ग्रामीण मुख्य रूप से बीमार हुए थे। उस कुएं के पानी का स्वास्थ्य विभाग द्वारा सैंपल लिया गया था और पीएचई विभाग को भेजा गया था जिसकी रिपोर्ट नॉर्मल आई है। उन्होंने कहा कि उस पानी में कोई दोष नहीं पाया गया है।
वही टीकमगढ़ जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर पी के माहोर का कहना है कि पीएचई विभाग द्वारा जो रिपोर्ट दी गई है वह बिल्कुल केमिकल रिपोर्ट है लेकिन बैक्टीरिया रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि जब तक बैक्टीरिया रिपोर्ट नहीं आती है तब तक पीएचई की रिपोर्ट को सही नहीं ठहराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अभी भी लोग उलटी दस्त से बहुत ज्यादा पीड़ित हो रहे हैं और गांव के स्कूल में बनाई गई अस्थाई अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा तीन दिन बाद भी लोग अचानक उल्टी दस्त से बीमार हो रहे हैं। इसलिए इस विभाग की रिपोर्ट पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।
नगारा गांव में 20 मई को अचानक पानी पीने से 50 से अधिक लोग बीमार हो गए थे। एक बच्चे की झांसी मेडिकल ले जाते समय ही गंभीर रूप से मौत हो गई थी। इस मामले में तुरंत सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा गांव में डेरा डाला गया था जो अभी भी जारी है।
ये लोग लगातार ग्रामीणों का इलाज कर रहे हैं। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर पीके माहोर ने बताया कि गांव में अहिरवार और राजपूत समाज के लोग सबसे ज्यादा उल्टी दस्त से पीड़ित है क्योंकि इन सभी ने उस कुएं के पानी का इस्तेमाल मुख्य रूप से किया था।

