न्यूज़लिंक हिंदी। गठबंधन का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 1 जून को बैठक बुलाई है। बैठक में किस दल से कौन शामिल होगा, इसकी आधिकारिक तौर पर जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी नेता ममता बनर्जी बैठक से दूर रहेंगी। उन्होंने इसकी पुष्टि भी पूर्ण रूप से कर दी है।
हालांकि वे प्रत्यक्ष तौर पर ऐसा किसी नाराजगी में नहीं करेंगी, बल्कि पहली जून को सातवें चरण के चुनाव का आखिरी दिन है। इसलिए उन्होंने कोलकाता में उस दिन बने रहना अपनी मजबूरी बताई है। विपक्ष के अन्य नेताओं में बिहार से आरजेडी के तेजस्वी यादव, तमिलनाडु से एमके स्टालिन, दिल्ली से अरविंद केजरीवाल और झारखंड से कल्पना सोरेन के बैठक में शामिल होने की पूरी संभावना है।
अरविंद केजरीवाल अभी जमानत पर हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्हें दो जून को सरेंडर करना है। चुनाव प्रचार के लिए सर्वोच्च अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत दी थी। बैठक का एजेंडा क्या है, इस बारे में भी अभी तक बहुत कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन के परफार्मेंस की समीक्षा होगी।
खरगे सबसे फीडबैक लेंगे कि किस राज्य से कितनी सीटें विपक्षी फोल्डर में आ रही हैं। इंडिया ब्लाक का अनुमान है कि उसे कम से कम 300 सीटें इस बार जरूर मिलेंगी और सरकार विपक्ष की बन जाएगी। संभव है कि केजरीवाल के जेल जाने से पहले खरगे संभावित सरकार के स्वरूप पर सहयोगियों से चर्चा करें।
हालांकि सत्ता पक्ष और विपक्ष अपनी-अपनी सीटों के अलग-अलग दावे करते रहे हैं। कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश का दावा है कि छह चरण के मतदान के बाद ही विपक्षी गठबंधन को बहुमत से अधिक सीटें मिल चुकी हैं। सातवें चरण में कुछ और सीटें विपक्ष के खाते में जा सकती है। अगर रमेश के दावे में दम है तो नरेंद्र मोदी की सरकार गई और इंडिया ब्लाक की सरकार बननी तय है।
दूसरी ओर भाजपा नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पांचवें चरण तक ही 300 से 310 सीटें एनडीए को मिलने का अनुमान लगा रहे हैं। कांग्रेस की यह कवायद पीएम फेस को लेकर भी हो सकती है। कांग्रेस यह जानना चाहेगी कि इंडिया ब्लॉक में शामिल दूसरे विपक्षी दल इस बारे में क्या सोचते हैं। वैसे कांग्रेस को यह मौका मिला तो यकीनन राहुल गांधी का नाम वह आगे करेगी। पर, ममता बनर्जी का इसके लिए तैयार होना जरूरी होगा।
ममता ने चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन की आखिरी बैठक में पीएम के रूप में मल्लिकार्जुन खरगे का नाम प्रस्तावित किया था, जिसका समर्थन अरविंद केजरीवाल ने भी किया था। खरगे ने भी पटना दौरे में हाल ही कहा था कि इंडिया ब्लॉक आपस में विचार विमर्श कर पीएम के नाम पर सहमति बनाएगा।
जानकार मानते हैं कि ममता बनर्जी ने खरगे का नाम इसलिए प्रस्तावित किया था कि राहुल को रास्ते से अलग किया जा सके। उनका दूसरा मकसद नीतीश कुमार को ठिकाने लगाना था, जो उस वक्त इंडिया ब्लॉक के साथ थे और संयोजक बनने के लिए बेताब थे। केजरीवाल के साथ ममता ने बैठक की पूर्व संध्या पर मुलाकात की थी। यह रणनीति केजरीवाल के घर पर ही तैयार हुई थी।
फिर अगले दिन बैठक में ममता ने यह प्रस्ताव रखा। तब खरगे की प्रतिक्रिया थी कि इस मुद्दे पर चुनाव बाद चर्चा की जाएगी। इंडिया ब्लॉक अगर अपने दावे के मुताबिक सरकार बनाने के लिए बहुमत पा भी जाता है तो पीएम पद के लिए घमासान से इनकार नहीं किया जा सकता। ममता बनर्जी का कांग्रेस के प्रति रवैया पश्चिम बंगाल में दिख चुका है।
उन्होंने गठबंधन के बावजूद कांग्रेस और वाम दलों को किनारे कर दिया। बंगाल की सभी संसदीय सीटों पर ममता ने अपने उम्मीदवार उतार दिए। ममता मानती हैं कि बंगाल में कांग्रेस और वाम दल उनके लिए भाजपा जैसे ही दुश्मन हैं। उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि विपक्षी गठबंधन की सरकार बनती है तो उनकी पार्टी उसमें शामिल होने के बजाय बाहर से समर्थन देगी। ममता दो नावों की सवारी करती दिख रही हैं।

