जिन्ना के देश को चीन ने बुरा फंसाया, पाकिस्तान का कर्ज एक दशक में दोगुना

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न्यूज़लिंक हिंदी। पाकिस्तान अपनी खराब अर्थव्यवस्था से बाहर निकलना चाहता है। पाकिस्तान को चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से बहुत उम्मीद है। हालांकि पाकिस्तान के ऊपर कर्ज पिछले एक दशक में दोगुना हो गया है।

2015 में 62 अरब डॉलर के CPEC को शुरू किया गया था, जिसे दोनों देशों की सरकारें और विश्लेषक एक गेम चेंजर के रूप में मानते हैं। इसमें एक प्रमुख बंदरगाह, पावर प्लांट और सड़क नेटवर्क का निर्माण भी शामिल है। हालांकि जितनी उम्मीद इस प्रोजेक्ट से जताई जा रही थी, एक दशक बाद अभी भी इसके भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

CPEC चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का महत्वपूर्ण अंग है। चीन इसे व्यापार बढ़ाने के लिए बना रहा है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह चीन के जियोपॉलिटिकल प्रभाव को बढ़ाने और पाकिस्तान जैसे गरीब देशों को कर्ज के जाल में फंसाने के लिए है।

CPEC में देश की ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ दक्षिण में ग्वादर बंदरगाह का निर्माण भी शामिल था। हालांकि शुरुआत में सफलताएं मिलीं, लेकिन देश में लगातार राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संकटों के कारण पाकिस्तान के CPEC की यात्रा कठिन हो गई। हाल ही में आर्थिक संकट से जूझ रहे।

सीपीईसी के कारण पाकिस्तान का विकास नहीं हो सका। लेकिन लगातार उसका कर्ज बढ़ता जा रहा है। 2013 में जब नवाज शरीफ सत्ता में थे तब पाकिस्तान का विदेशी कर्जा 59.8 बिलियन डॉलर था। आज एक दशक से ज्यादा समय बाद उनके भाई सत्ता में हैं।

पाकिस्तान कर्ज अब 124 बिलियन डॉलर से ऊपर है, जिसमें से 30 अरब डॉलर सिर्फ चीन का ही बकाया है। पाकिस्तान के घटते विदेशी भंडार पर कर्ज के बोझ ने आयात पर निर्भर देश के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

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