न्यूज़लिंक हिंदी। गरीब परिवारों से उनके नवजात बच्चों को बेहतर लालन-पालन करने की आड़ में गोद ले लेता था और आगे उनको बेचने का गोरखधंधा भी कर रहा था।
इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब आरोपी परिवार की एक सदस्य को किसी से फोन पर बच्चे की सौदेबाजी 5 लाख रुपए में करने की संदिग्ध बात करते सुना, जिसके बाद पुलिस को पीसीआर कॉल दी गई। पुलिस ने महिला से बच्चे के बारे में सवाल जवाब किए लेकिन महिला जवाब नहीं दे सकी।
जिसके बाद इस बच्चा खरीद फरोख्त करने वाले गैंग का पर्दाफाश मुख्य रूप से हुआ,अब मामला कोर्ट के समक्ष विचाराधीन के मुख्य है। पुलिस ने मामले में चार्ज शीट दायर की है जिसमें कई बड़े खुलासे हुए हैं। दरअसल, यह पूरा मामला इस साल फरवरी महीने का है।
20 फरवरी को बेगमपुर पुलिस को दोपहर के वक्त एक पड़ोसी की ओर से पीसीआर कॉल की गई जिसमें उसने आशंका जताई कि उसके पड़ोस में रहने वाली 29 साल की प्रिया अपने घर की बालकनी में ₹500000 में एक बच्चे की सौदेबाजी को लेकर बातचीत कर रही है।
शिकायतकर्ता ने घर के अंदर से एक बच्चे की रोने की आवाज भी सुनी थी। इसके बाद उसने पुलिस को इस बारे में मुख्य सूचना दी जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई। इस शिकायत के बाद मौके पर बेगमपुर पुलिस स्टेशन की एक टीम थाना अध्यक्ष रवि रंजन के नेतृत्व में पहुंची थी।
मामले की तफ्दीश की गई तो पता चला कि प्रिया, उसकी मां देवकी और उसका भाई पीयूष उस फ्लैट में रहते हैं जिसको 34 वर्षीय संग्राम दास ने 4 महीने पहले ही किराए पर ही लिया था। परिवार के चारों सदस्य इस घटना के सामने आने से करीब चार महीने पहले ही आए थे और किसी से कोई खास मतलब नहीं रखते थे।
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी प्रिया और देवकी दोनों ने घर में मिले नवजात बच्चे के माता-पिता के बारे में किसी प्रकार की कोई सटीक जानकारी नहीं दी। जिसके चलते इन तीनों को मुख्य गिरफ्तार कर लिया गया। संग्राम दास मौके से फरार मिला। इसके बाद पुलिस ने इस बच्चा बेचने वाले रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए आगे की मुख्य कार्रवाई की।
हाल ही में दिल्ली पुलिस की ओर से इस मामले में रोहिणी कोर्ट में एक चार्जशीट भी दायर की गई है जिस पर कोर्ट ने गंभीर संज्ञान भी लिया है। इसमें पुलिस ने बताया है कि आरोपी कथित तौर पर गरीब परिवार के बच्चों को गोद लेने के लिए उनके बेहतर पालन पोषण और अच्छी देखभाल करने का लालच देकर जाल में फंसाते थे।
इसके बाद इन बच्चों के खरीदारों को बच्चों से जुड़ा वीडियो भी मुख्य रूप से साझा किया करते थे। पुलिस ने इस पूरे मामले में 5 महिलाएं और 4 पुरुषों को आरोपी बनाया है जिनके खिलाफ तस्करी, साजिश और अन्य आईपीसी की धाराओं के तहत पूर्ण मामला दर्ज किया गया था।

