न्यूज़लिंक हिंदी। हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह सवाल उठाया है कि क्या ताजमहल और लाल किला जैसी ऐतिहासिक इमारतों को भी वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया जाना चाहिए?
जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच ने बुरहानपुर में स्थित मुगल बादशाह शाहजहां की बहू बीबी साहिब और नादिरशाह के मकबरे को वक्फ बोर्ड की संपत्ति मानने से पूर्ण इनकार कर दिया। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कोई इमारत प्राचीन स्मारक घोषित है तो उसे वक्फ की संपत्ति बताना ही बेमानी है।
मामला वक्फ की तीन संपत्तियों पर अतिक्रमण के आरोप से जुड़ा था। वक्फ बोर्ड की तरफ से मांग की गई थी कि इन संपत्तियों से अतिक्रमण हटाने का मुख्य आदेश दिया जाए। इस पर कोर्ट ने वक्फ बोर्ड से इन संपत्तियों के वक्फ बोर्ड की संपत्ति होने के दस्तावेज मांगे। लेकिन, वक्फ बोर्ड कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर पाया।
जस्टिस अहलूवालिया ने कहा कि क्या ताजमहल और लालकिला सहित देश की सारी संपत्ति को वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित कर दें? उन्होंने आगे कहा कि जो इमारतें देश की धरोहर की श्रेणी में आती हैं, वे केंद्र सरकार के संस्कृति विभाग के ही पूर्ण अधीन होती हैं।
कोर्ट ने अपने फैसले में जिले की तीनों संपत्तियों को वक्फ बोर्ड की जगह केंद्र सरकार के अधीन करने का मुख्य आदेश दिया। इससे पहले वक्फ बोर्ड ने इन संपत्तियों पर अपना दावा भी ठोका था। यह मामला हाई कोर्ट में लंबे समय से चल रहा था। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी मुख्य दलीलें रखी थीं। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया है।

