न्यूज़लिंक हिंदी। पाकिस्तान आजादी का जश्न मनाया जा रहा है, भारत से एक दिन पहले यानी 14 अगस्त को वहां स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।
आजादी के जश्न के बीच बार-बार यह भी सवाल उठता है कि आखिर पहली बार पाकिस्तान के नाम से अलग देश बनाने की मांग किसकी थी, मोहम्मद अली जिन्ना या रहमत अली। यह वो दौर था जब ब्रिटिश भारत में हिन्दू-मुस्लिम में विवाद शुरू हो चुके थे, 16 नवंबर 1897 को ब्रिटिश भारत के पंजाब इलाके के बालाचौर में जन्मे रहमत अली ने अपने विचार को अमली जाना पहनाने के लिए कदम आगे बढ़ाए।
साल 1933 में तीसरे राउंड टेबल कांफ्रेंस के दौरान लंदन में ब्रिटिश और भारतीय प्रतिनिधियों के बीच अपने विचार रखने की कोशिश की और करवां आगे बढ़ता गया। इस कदम के साथ ही उन्होंने पाकिस्तान नेशनल मूवमेंट की शुरुआत की ओर देखते ही देखते मुस्लिम लीग ने इसका झंडा हाथ में उठा लिया।
मुस्लिम लीग के कारण यह मान लिया गया कि पाकिस्तान नाम से अलग देश की मांग मोहम्मद अली जिन्ना ने की है।बाद में जिन्ना को ही पाकिस्तान का संस्थापक कहा कहा और माना गया की दिलचस्प बात है कि मुस्लिम देश का आइडिया और उसे पाकिस्तान नाम देने का काम रहमत अली ने ही किया था, लेकिन उन्हें ही पाकिस्तान ने देश से बाहर ही निकाल दिया गया।
पाकिस्तान को यह नाम देने वाले रहमत अली ने मुस्लिम देश की जो कल्पना की थी असल में पाकिस्तान वैसा नहीं था, पाकिस्तान को लेकर उनकी सोच थी जिन्ना के फैसले के बाद वो पूरी नहीं हो सकी। यही वजह रही कि उन्होंने जिन्ना को लेकर ही मोर्चा खोल दिया। पाकिस्तान के कई दिग्गजों को नगवार गुजरा और रहमत के बागी तेवरों के कारण उन्हें देश से निकाल दिया गया।
आखिर वो दिन आया जब रहमत का सपना तो सच हुआ, लेकिन हालात कुछ और ही थे, 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बना तो उसकी मांग करने वाले रहमत अली वहां थे ही नहीं। वह इंग्लैंड में थे। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। उन्हें शिकायत थी कि पाकिस्तान के बंटवारे को जिन्ना ने क्यों मंजूरी दी। विवाद बढ़ता गया और धीरे-धीरे लोग उन्हें भूल गए।
पाकिस्तान से निकाले जाने के बाद वह इंग्लैंड चले गए. आर्थिक तंगी में हालात बिगाड़े, कर्ज लेकर जीवन जिया और जब उसे चुका नहीं पाए तो दिवालिया हो गए। बिगड़े हालातों के बीच 3 फरवरी 1951 को उनकी मौत भी हो गई। किसी को इस बात की जानकारी नहीं मिली। घर में लाश सड़ने लगी और बदबू जब पड़ोसियों तक पहुंची तो अंतिम संस्कार किया गया।
रहमत अली और अल्लामा इकबाल दोनों ही अलग मुस्लिम देश के पूर्ण समर्थक थे, रहमत ने तो पाकिस्तान के नाम से वीकली मैगजीन निकाली। पाकिस्तान का एक नक्शा भी छपवाया, जिसमें तीन मुस्लिम देश दिखाए गए थे। पाकिस्तान, बंगिस्तान और दक्षिणी उस्मानिस्तान। बंगिस्तान का मतलब आज के बांग्लादेश से है। दक्षिणी उस्मानिस्तान का मलब निजाम हैदराबाद के क्षेत्र से था।
साल 1905 में बंगाल के बंटवारे के साथ ही हिन्दू-मुस्लिम विवाद भी शुरू हो गए, मुस्लिम बहुल क्षेत्र को पूर्वी बंगाल कहा गया और हिन्दुओं की अधिक आबादी वाले हिस्से को पश्चिम बंगाल इसके ठीक एक साल बाद 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना हुई और जोरशोर से मुस्लिमों के हितों की बात भी होने लगी। रहमत अली और अल्लामा की मांग के बीच इसे नए देश से जोड़ा जाने लगा।
इकबाल ने जिन्ना को पत्र लिखा और अलग मुस्लिम राष्ट्र बनाने की बात भी कही। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिना अलग देश के बात नहीं बनेगी। किसी स्वतंत्र और मुस्लिम देश के बिना इस देश में इस्लामी शरीयत का पालन करना आसान नहीं है। अगर ऐसा कदम नहीं उठाया जाता है तो देश में गृह युद्ध जैसे हालात भी बन सकते हैं।

