एससी-एसटी के आरक्षण मामले में, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आज देशभर में भारत बंद का आह्वान

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न्यूज़लिंक हिंदी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने यह मुख्य फैसला लिया है। भारत बंद के फैसले को देखते हुए सरकार ने प्रदर्शन के दौरान कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

दरअसल संगठनों को आपत्ति है कि कोर्ट ने कहा कि आरक्षण का फायदा सबसे ज़्यादा जरूरतमंद लोगों को ही मिलना चाहिए। संगठनों ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि इससे आरक्षण के सिद्धांतों को नुकसान पहुंचेगा। हालांकि भारत बंद का असर स्कूल-कॉलेज, दफ्तर समेत कई संस्थानों में बिल्कुल भी नहीं पड़ेगा और वह रोजाना की तरह काम करते रहेंगे।

बिहार के जहानाबाद से एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में बंद समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी देखी जा सकती है। बता दें कि दलित और आदिवासी संगठनों ने हाशिए के समुदायों के लिए मजबूत प्रतिनिधित्व और सुरक्षा की मांग को लेकर आज ‘भारत बंद’ का आह्वान किया गया हैं।

अखिलेश यादव ने बुधवार को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण श्रेणियों के भीतर क्रीमी लेयर की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ बुलाए गए ‘भारत बंद’ को अपना पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि आरक्षण की रक्षा के लिए जन आंदोलन एक सकारात्मक प्रयास है और यह शोषित और वंचित लोगों में नई चेतना पैदा करेगा।

उन्होंने कहा कि आरक्षण की रक्षा के लिए जन आंदोलन एक सकारात्मक प्रयास है। यह शोषितों और वंचितों के बीच नई चेतना को भी पैदा करेगा और आरक्षण के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ के खिलाफ लोगों की शक्ति का कवच भी साबित होगा। शांतिपूर्ण आंदोलन एक लोकतांत्रिक का मुख्य अधिकार है।

भारत बंद का प्रभाव राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अधिक देखा जाएगा। राजस्थान में इसका सबसे ज्यादा प्रभाव देखने की भी उम्मीद है। बता दें कि भारत बंद का स्कूल-कॉलेज, दफ्तर, बैंक और बाकी चीजों पर असर नहीं पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के बीच में ही अलग-अलग श्रेणियां बनाने की राज्य सरकारों को पूर्ण इजाजत दे दी है। इस फैसले से बहुत ही ज्यादा विवाद हुआ है। कोर्ट ने कहा कि आरक्षण का फायदा सबसे ज़्यादा ज़रूरतमंद लोगों को मिलना चाहिए।

लेकिन कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने इस फैसले का जमकर विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे आरक्षण के सिद्धांतों को बहुत ही नुकसान पहुंचेगा। इस फैसले के खिलाफ और इसे वापस लेने की मांग को लेकर ही भारत बंद का मुख्य आह्वान किया गया है।

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