साबरमती एक्सप्रेस की जांच स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रुप टीम कर रही, पायलट के बयान से हादसा या साजिश के सवाल पर जांच उलझ गई

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न्यूज़लिंक हिंदी। साबरमती एक्सप्रेस के बेपटरी होने के मामले में अब एसएजी की पांच सदस्यीय टीम जांच पूर्ण कर रही है। एसएजी ने मंगलवार और बुधवार को घटनास्थल पर पहुंचकर इंजन और कोच देखे।

इसके बाद स्टाफ से पूछताछ भी की लेकिन ये हादसा है या साजिश, एसएजी भी तय नहीं कर पा रही है। बुधवार को कई रेलवे कर्मियों के बयान दर्ज किए गए। दरअसल इसमें लोको पायलट की गवाही बहुत ही अहम है। उनके मुताबिक कोई भारी वस्तु टकराई, जिससे हादसा हुआ।

लोको पायलट का यह बयान जहां साफ तौर पर षड्यंत्र की ओर ही संकेत कर रहा है, वहीं जांच एजेंसियां इसके विपरीत दुर्घटना की बात कह रही हैं। दरअसल रेलवे के इलेक्ट्रिकल, इंजीनियरिंग, आरपीएफ, आपरेशन समेत अन्य विभागों की जो रिपोर्ट एसएजी को मिली है, उसके आधार पर ट्रैक में बाहरी वस्तु मिलने की भी बात कही गई है। ऐसे में यह ट्रेन को पलटाने की साजिश का भी संकेत है।

लोको पायलट एपी सिंह बुंदेला और सहायक लोको पायलट चेतराम मीना भी यही बात कह रहे हैं। इसी आधार पर एसएजी की टीम ने पटरी के टुकड़े को लेकर रेल ट्रैक पर कई बार परीक्षण भी कर चुकी हैं। बताया गया कि यह इतना आसान नहीं है। यदि क्लैंप से पटरी के टुकड़े को रेल ट्रैक पर बांधा गया था तो जिससे चीज से बांधा गया, उसके अवशेष भी मिलने चाहिए थे।

एक तथ्य और निकलकर भी सामने आया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी कोच के पहिए जाम हो गए हों, जिसके बाद इमरजेंसी ब्रेक से ट्रेन पटरी से उतर गई। हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं कि यह भी संभव नहीं है। यदि कोच के पहिए जाम होते तो एलएचबी कोच होने के चलते रेल ट्रैक पर घर्षण से छेद हो जाता।

साथ ही कोच पटरी से उतरते नहीं। दुर्घटना की इन अलग-अलग थ्योरी को लेकर एसएजी टीम लगातार परीक्षण में जुटी हुई है। उसके लिए भी यह अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है कि साबरमती एक्सप्रेस साजिश का शिकार हुई या फिर रेलवे की ही किसी खामी से ही हादसा हुआ। बहरहाल अभी जांच चल रही है।

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