न्यूज़लिंक हिंदी। टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने लगभग 20,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुका दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने भारतीय रिजर्व बैंक को स्वेच्छा से अपना रजिस्ट्रेशन ऑफ सर्टिफिकेट सौंपने का अनुरोध किया है।
इस रणनीतिक कदम के बाद कंपनी को लिस्ट होने की जरूरत नहीं होगी। अगर कंपनी यह कर्ज नहीं चुकाती तो आरबीआई के नियमों के मुताबिक उसे लिस्ट होना पड़ता। लेकिन टाटा संस ने लगभग 20,300 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज का भुगतान कर दिया। कंपनी की सालाना फाइलिंग के मुताबिक इसमें 363 करोड़ रुपये की राशि के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर और प्रीफेरेंशियल शेयर शामिल नहीं हैं।
टाटा संस का कहना है कि उसने अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र को सरेंडर करने के साथ ही आरबीआई को इस बारे में एक अंडरटेकिंग भी दिया है। टाटा संस के कोर इनवेस्टमेंट कंपनी के रूप में ग्रुप की कंपनियों में निवेश करने के लिए बैंकों और बाजारों से पैसा उधार लेती है। आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को एनबीएफसी-अपर लेयर के रूप में क्लासीफाई किया था।
आरबीआई के नियमों के तहत एनबीएफसी-यूएल को इस तरह के क्लासिफिकेशन के तीन साल के भीतर लिस्ट होना चाहिए। लेकिन ऋण के भुगतान के बाद प्रमोटर रिस्क प्रोफाइल में भारी कमी मुख्य रूप से आ गई है, इससे पहले, दिसंबर में, टाटा संस ने बायबैक के दौरान TCS में 29.6 मिलियन शेयर टेंडर करके ₹12,000 करोड़ से अधिक जुटाए थे।
हिस्सेदारी बिक्री के बाद TCS में टाटा संस की हिस्सेदारी दिसंबर 2023 में लगभग 72.38% से घटकर मार्च 2024 में 71.74% रह गई है। कंपनी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में ये भी कहा कि उसने अपने नए और मौजूदा व्यवसायों में पूंजी की आवश्यकता, विकास और अपनी बैलेंस शीट को कम करने के आधार पर पूर्ण निवेश भी किया गया है।

