न्यूज़लिंक हिंदी। कर्नलगंज थाने की पुलिस को झूठी सूचना देकर किया गुमराह , प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित और चर्चित जुआरी व सट्टेबाज मासूम अली के साथियों को जब पुलिस पकड़ने निकली तो झूठी सूचना देकर भरमाने वाले चौकी प्रभारी जेके मंदिर राजन मौर्य को निलंबित कर दिया गया है।
एडीसीपी सेंट्रल की जांच के आधार पर मंगलवार को डीसीपी सेंट्रल ने निलंबन की कार्रवाई की। दारोगा के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है।
कर्नलगंज पुलिस ने पिछले दिनों कुली बाजार निवासी मासूम अली को गिरफ्तार कर किया था। इस दौरान मासूम के साथी नावेद, तलहा शफीक उर्फ जैन, राजा बरक और शारिक अंधेरे का फायदा उठाकर मोके से भाग गए थे।
शनिवार को पुलिस को सूचना मिली कि तलहा अशोक नगर में छिपा है। इस पर कर्नलगंज इंस्पेक्टर टीम के साथ उसे पकड़ने रवाना हुए। ठिकाने से कुछ दूरी पहले नजीराबाद थाने के जेके मंदिर चौकी प्रभारी राजन मौर्य ने दबिश टीम में शामिल एक दारोगा को फोन करके बताया कि उनके थाने में पुलिस आयुक्त पहुंच रहे हैं।
इसकी वजह से जांच टीम को छापा मारने में 10 मिनट का विलंब हुआ और फायदा उठाकर आरोपित मोके से भाग निकला। प्रकरण में शिकायत हुई तो जांच भी शुरू की गई। सोमवार को राजन मौर्य के बयान और दबिश देने गई पुलिस टीम के बयान एडीसीपी सेंट्रल महेश कुमार के यहां हुए थे। असल में दारोगा यह नहीं बता पाया कि आखिर उसने पुलिस आयुक्त के कर्नलगंज थाने पहुंचने की झूठी सूचना क्यों दी गई।
पुलिस को सट्टेबाज मासूम अली के पास से एक डायरी भी मिली थी, जिसमें पत्रकार शनि जायसवाल, लकी ठाकुर, राजा अहिरवार, विकास अवस्थी के नाम भी लिखे थे। विकास को 20 हजार रुपये महीना देने की बात भी डायरी में है। ये सभी अवनीश दीक्षित का बहुत ही करीबी हैं।
इस लिहाज से यह गिरोह अवनीश का ही मुख्य रूप से बताया जा रहा है। दारोगा राजन मौर्य के मोबाइल नंबर की सीडीआर भी पूर्ण रूप से निकलवाई जा रही है ताकि देखा जा सके कि वह किस तरह से इस गिरोह के संपर्क में था।

