Jabalpur : मेडिकल कॉलेज में पीजी की छात्रा हुई रैगिंग का शिकार, 48 घंटे तक बिना बाथरूम जाए करवाया काम,जाने आगे

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न्यूज़लिंक हिंदी। मेडिकल कॉलेज में पीजी की छात्रा बनी रैगिंग का शिकार , इससे पीड़ित पीजी मेडिकल छात्रा ने सीट छोड़ने के लिए मूल दस्तावेज मांगे, तब कॉलेज प्रबंधन से दस्तावेज देने के ऐवज में छात्रा से 30 लाख रूपये की कर दी मांग।

जिसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी, याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने याचिकाकर्ता को राहत प्रदान करते हुए बिना राशि लिये मूल शैक्षणित दस्तावेज लौटने के आदेश भी जारी किये हैं।

मिली जानकारी के अनुसार , कॉलेज में छात्रा को लगातार 36 घंटे से 48 घंटे तक बिना बाथरूम जाए जूनियर डॉक्टर के रूप में काम करने की सजा दी थी। जिसके बाद छात्रा डिप्रेशन में चली गई थी।

जबलपुर के सुभाष चंद्र मेडिकल कॉलेज में पीजी पाठ्यक्रम की छात्रा की तरफ से दायर याचिका में कहा गया कि वह मूलतः ओडिशा की ही निवासी है, वह ईडब्लयू श्रेणी की छात्रा है और साल 2022 में मेडिकल कॉलेज में पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश भी दिया गया था। उसके पिता एक गरीब किसान हैं और अच्छी योग्यता के कारण उसके डीएमई काउंसलिंग के माध्यम से पीजी सीट आवंटित हुई थी।

सरकारी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की शिकार हुई और उसे लगातार 36 घंटे से 48 घंटे तक बिना बाथरूम जाए जूनियर डॉक्टर के रूप में काम करने का निर्देश भी दिया गया , वह डिप्रेशन में चली गई और स्पाइनल इंजरी की मरीज बन गई। किसान पिता जब बेटी से मिलने आये तो उसकी आत्महत्या की प्रवृत्ति को देखकर हैरान ही रह गए।

उन्होंने डीन से मूल दस्तावेज वापस करने का मुख्य अनुरोध भी किया, ताकि वह अपनी बेटी को वापस उड़ीसा ले जा सकें। डीन ने ये भी कहा पीजी सीट छोडने के लिए 30 लाख रुपये जमा करें अन्यथा मूल दस्तावेज बिल्कुल भी वापस नहीं किए जायेंगे।

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