न्यूज़लिंक हिंदी। महज कुछ ही दिन में एक के बाद एक हुई रेल ट्रैक पर घटनाएं किसी बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा कर रही हैं। साथ ही हर असफल घटना के बाद अगली घटना भी बड़े खतरे के संकेत भी दे रही है।
कालिंदी एक्सप्रेस को डिरेल करने की नाकाम कोशिश से पहले भी कानपुर मंडल से गुजरने वाली ट्रेनों को निशाना भी बनाया जा चुका है। हाल ही में फर्रुखाबाद में कासगंज-फर्रुखाबाद एक्सप्रेस लकड़ी के टुकड़े से टकराई थी लेकिन जांच एजेंसियों से लेकर रेलवे प्रशासन में किसी ने भी इसे किसी साजिश के तौर पर मानने से आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से इनकार कर दिया।
वहीं, 16 अगस्त की रात पनकी के नजदीक साबरमती एक्सप्रेस के सामने ट्रैक पर एक और पटरी रखकर बड़ा हादसा करने की कोशिश की गई थी। घटना के दौरान ट्रेन की 22 बोगियां डिरेल भी हो गईं लेकिन कोई भी हताहत नहीं हुआ।
इस मामले में एनआईए से लेकर रेलवे की भी एजेंसी ने पड़ताल की लेकिन जांच अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। इसी बीच, रविवार रात हुई घटना में रेलवे की ओर से पहले ही साफ कर दिया गया है कि संचालन में कोई लापरवाही बिल्कुल भी नहीं।
वहीं, ट्रैक पर भरा गैस सिलिंडर मिलने, पास में ही पेट्रोल बम, बारूद जैसा पदार्थ और माचिस मिलना इस बात का संकेत है कि पिछली घटनाओं के असफल होने के बाद साजिशकर्ता इस बार और तैयारी के साथ घटना को अंजाम देने पहुंचे थे।
कानपुर से होकर गुजरने वाला ये पूरा ट्रैक जीटी रोड के किनारे है। ऐसे में अधिकारी मान रहे हैं कि साजिशकर्ताओं के लिए इस ट्रैक को निशाना बनाना और अपने मंसूबों को अंजाम देना किसी भी और जगह से ज्यादा मुफीद नहीं है।मामले की जांच अभी चल रही है।

