Aligarh Muslim University : अब इंतजार हुआ खत्म, सु्प्रीम कोर्ट द्वारा अल्पसंख्यक दर्जे पर सुनाया जा रहा फैसला

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न्यूज़लिंक हिंदी। सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जा को लेकर आज अपना फैसला सुना रहा है, भारत के मुख्य न्यायाधीश अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ यह मुख्य रूप से तय कर रही है कि विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा बना रहेगा या नहीं।

इससे पहले सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, इस पीठ में सीजेआई के अलावा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, सूर्यकांत, जे.बी. पारदीवाला, दीपांकर दत्ता, मनोज मिश्रा और एससी शर्मा शामिल हैं।

जस्टिस सूर्यकांत जस्टिसम दीपाकंर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा का असहमति का फैसला, इस मामले में CJI का सवाल था कि किसी शैक्षणिक संस्थान को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान मानने के क्या संकेत हैं? क्या किसी संस्थान को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान इसलिए माना जाएगा क्योंकि इसकी स्थापना किसी धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यक वर्ग के व्यक्ति द्वारा की गई है।

या इसका प्रशासन किसी धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यक वर्ग के व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है? संविधान पीठ इस मामले में 4:3 के बहुमत से अपना फैसला मुख्य रूप से सुना रही है। बस थोड़ी ही देर में साफ हो जाएगा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रहेगा या नहीं।

अलीगढ़ से बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने ये भी कहा, “एएमयू का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, यहां तक ​​कि लोकसभा में भी मैंने कम से कम 10 बार एससी, एसटी और ओबीसी के पक्ष में आरक्षण का मुख्य मुद्दा उठाया है। हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा है।

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2006 के एक फैसले के संबंध में सुनवाई कर रही थी, हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान बिल्कुल भी नहीं है। साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने इस मामले को सात जजों की पीठ को सौंप दिया था।

सात जजों की संविधान पीठ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को भारत के संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने के संबंध में दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई की और बाद में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने इस मामले की आठ दिनों तक सुनवाई की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने एएमयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय माना था, लेकिन साल 1981 में एएमयू अधिनियम 1920 में संशोधन लाकर संस्थान का अल्पसंख्यक दर्जा बहाल कर दिया गया था। बाद में इसे इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

अब इस फैसले का असर यह होगा कि अगर सुप्रीम कोर्ट अब ये मानता है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं रहेगा तो इसमें भी एससी/एसटी और ओबीसी कोटा भी लागू होगा। साथ ही इसका असर जामिया मिलिया इस्लामिया पर भी मुख्य रूप से पड़ेगा।

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