बैक्टीरियल संक्रमण के खिलाफ अब इलाज खोज लिया, अब देश में बनी पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक दवा

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न्यूज़लिंक हिंदी। अब भारत ने बैक्टीरियल संक्रमण के खिलाफ एक जबरदस्त इलाज खोजा लिया है। नेफिथ्रोमाइसिन 14 वर्षों में विकसित पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन से 10 गुना अधिक प्रभावी है।

और निमोनिया के इलाज में केवल तीन दिन लगते हैं। यह दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया के खिलाफ भी कारगर है। नेफिथ्रोमाइसिन का विकास वाकहार्ट लिमिटेड और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान परिषद के सहयोग से ही किया गया है।

मरीजों को घातक बैक्टीरियल संक्रमण से बचाने के लिए रामबाण इलाज मिल गया है। भारत में अब तक की सबसे सटीक एंटीबायोटिक नेफिथ्रोमाइसिन दवा विकसित भी कर ली गई है, जो जल्द ही बाजार में भी होगी। बैक्टीरियल निमोनिया से पीड़ित के लिए यह दवा संजीवनी के समान होगी।

यह अब तक इस्तेमाल की जाने वाली एजिथ्रोमाइसिल की तुलना में आठ से 10 गुना असरदार होने के साथ इलाज में आसान व कम वक्त भी लेगी। कई एंटीबायोटिक का प्रयोग कर चुके बैक्टीरियल संक्रमण के मरीजों के लिए नेफिथ्रोमाइसिन प्रतिरोधी रोगजनकों के खिलाफ प्रभावी भी बनी हुई है।

मुंबई स्थित वाकहार्ट लिमिटेड ने केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद के सहयोग से इसको विकसित भी पूर्ण रूप से किया गया है।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलाजी विभाग के प्रो. विकास मिश्रा के अनुसार, निमोनिया के कारण बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग दम तोड़ते हैं। निमोनिया, टीबी और यूटीआइ जैसे आम संक्रमण का इलाज करना भी मुश्किल होता जा रहा है। अभी तक ऐसे इनका इलाज एंटीबायोटिक से किया जाता है।

एंटीबायोटिक के अधिक डोज लेने से अब मरीजों में दवा असर बिल्कुल भी नहीं कर रही है। ऐसे में नेफिथ्रोमाइसिन निमोनिया के गंभीर मरीजों को राहत देगी। यह दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया के खिलाफ भारत में विकसित पहली एंटीबायोटिक है। इसे तीन दिनों तक दिन में एक बार देकर निमोनिया को काबू किया जा भी सकता है।

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