रिफाइंड ऑयल का आजकल ही बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। रिफाइंड ऑयल ऐसा तेल है जिसे कई प्रोसेस के बाद तैयार होता है। बाजार में कई तरह के रिफाइंड ऑयल जैसे सोयाबीन ऑयल, सनफ्लावर ऑयल, मूंगफली तेल, राइस ब्रान ऑयल, पाम ऑयल भी मिलते हैं।
और ऐसा माना जाता है कि कई प्रोसेस से गुजरने के बाद इसके नेचुरल पोषक तत्व जैसे विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट खत्म हो जाते हैं। संपूर्ण स्वास्थ्य योग केंद्र संस्थापक और आयुर्वेद एक्सपर्ट महारुद्र शंकर शेटे का कहना है कि अगर आपने रिफाइंड तेल पर कंट्रोल नहीं किया, तो उससे आपको खांसी, निमोनिया, अस्थमा और अन्य कई सांस की बीमारियां भी हो सकती हैं।
और एक्सपर्ट का मानना है कि रिफाइंड ऑयल खाने से यह गले में नासिका मार्ग से जाकर चिपकता है और पचता नहीं है। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि जब आप सांस लेते हैं, तो बहुत सारे धूल और मिट्टी के कण गले और सांस की नली में जाकर इस तेल के साथ चिपक जाते हैं और बलगम भी बनने लगता है।
इसके अलावा एक्सपर्ट का मानना है कि रिफाइंड सिर्फ सांस के रोग या खांसी का ही नहीं बल्कि कई बीमारियों की जड़ है। सवाल यह है कि रिफाइंड ऑयल के बजाय किस तेल का इस्तेमाल करना चाहिए? एक्सपर्ट ने बताया कि रिफाइंड ऑयल को 100 फीसदी बंद करें क्योंकि यह कई बीमारियों की जड़ है।
और इसके सेवन से ट्रांस फैट और खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकता है। इसमें मौजूद हानिकारक फैट वजन बढ़ा सकता है। लंबे समय तक अधिक मात्रा में रिफाइंड तेल का उपयोग इंसुलिन रेसिस्टेंट को प्रभावित कर सकता है। हाई टेम्प्रेचर पर तलने के कारण तेल में हानिकारक यौगिक भी बन सकते हैं, जिससे कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
और एक्सपर्ट ने बताया कि खाना बनाने के लिए सबसे अच्छा तेल कच्ची घानी या सरसों का तेल है। साथ ही एक्सपर्ट ने बताया कि सरसों का तेल बेशक बढ़िया है लेकिन आपको इसका भी बहुत कम मात्रा में सेवन करना चाहिए। इसका सेवन करने से आपको जिंदगीभर सर्दी नहीं होगी।