हर उम्र के हिसाब से कितना होना चाहिए ब्लड शुगर लेवल, ब्लड शुगर लेवल को दो मुख्य परीक्षणों का उपयोग करके मापा जाता है। पहला है फास्टिंग ब्लड शुगर यह कम से कम 8 घंटे के उपवास या भोजन से परहेज के बाद शरीर में ब्लड शुगर लेवल को मापता है।
यह जांच आपको बता सकता है कि फास्टिंग की स्थिति में आपका शरीर ग्लूकोज को किस प्रकार तोड़ता है, जो आधारभूत विनियमों के बारे में अधिक स्पष्टता प्रदान भी करता है।
और दूसरा है रैंडम ब्लड शुगर किसी भी समय ग्लूकोज के स्तर को मापता है, चाहे आपने आखिरी बार कब खाया हो यह इस जांच में मायने नहीं रखता है।
इसका उपयोग हाइपरग्लाइसेमिया या हाइपोग्लाइसेमिया के लक्षणों की पहचान के लिए ही किया जाता है, क्योंकि इससे पता चलता है कि आपका शरीर किसी भी समय ग्लूकोज से कैसे निपटता है।
और दोनों टेस्ट इस बारे में बेहद मूल्यवान जानकारी देते हैं कि आपका शरीर ब्लड शुगर लेवल को कैसे मैनेज कर रहा है, इसलिए, डायबिटीज या अन्य मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के लक्षणों की पहचान के लिए यह जांच बेहद ही जरूरी होता है।
आपका फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल 130 mg/dL से ऊपर रहेगा और रैंडम ब्लड शुगर 180 mg/dL से अधिक रहेगा। अगर आपका ब्लड शुगर लेवल लगातार इन सीमाओं से ऊपर है, तो आपको प्री-डायबिटीज या डायबिटीज भी हो सकता है।
अगर इसे कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह हार्ट डिजीज, तंत्रिका समस्याओं और किडनी की बीमारियों जैसी गंभीर चिकित्सा समस्याओं का कारण भी बन सकता है।
इसके अलावा अगर आपको लो ब्लड शुगर की समस्या है, तो आपका फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल 70 mg/dL से कम रहेगा और रैंडम ब्लड शुगर 60 mg/dL से कम रहेगा। आपकों लो ब्लड शुगर के कारण चक्कर आना, भ्रम, बेहोशी और दुर्लभ मामलों में दौरे भी पड़ सकते हैं।
यह आमतौर पर इंसुलिन या एंटीडायबिटिक दवा लेने वाले रोगियों में ही पाया जाता है, या जो बहुत लंबे समय तक फास्टिंग करते हैं या बहुत लंबे समय तक व्यायाम भी करते हैं।