आज World Radio Day पर, रेडियो के इतिहास और वर्तमान के बारे में जानिए। गांव, शहर, नुक्कड़, दुकान से लेकर घरों तक साथ बैठकर क्रिकेट मैदान का आंखों देखा दृश्य सुन आप जरूर उछले होंगे।
खेत में सिंचाई, बाग में आम की बौर के बीच भीनी खुशबू, सुबह-दोपहर या शाम जरूर मनपसंद गाने सुनते गुजरी होगी। …जी हां, ये रेडियो है।
और अब के बुजुर्गों को तब शादी-विवाह में उपहार में रेडियो मिलना बड़ी बात थी। रेडियो जो मीडियम वेव, शार्ट वेव से अब एफएम पर है। उद्घोषक हैं, रेडियो जॉकी हैं। सामुदायिक रेडियो हैं।
कार, मोबाइल फोन, कंम्यूटर, टीवी से लेकर कार्यालयों, परिसरों, होटलों, रेस्तरां समेत आधुनिकता की दौड़ में हर कोने तक बालीवुड, पाश्चात्य, भारतीय संगीत व विविध भाषाओं में घुली शोख अदाओं वाली आवाजें कानों के रास्ते सीधे दिल में खूब उतर रही हैं। 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस है।
इसके साथ ही रेडियो अब मेट्रो का हाल भी बता रहा है। जैसे मोतीझील से मेट्रो का समय इतना है…आइआइटी स्टेशन से आई मेट्रो रावतपुर स्टेशन से गुजर चुकी है।
10 लाख से अधिक लोग पूरे दिन अपडेट रहते हैं। आइआइटी कानपुर में अपना कम्युनिटी रेडियो स्टेशन 90.4 को छात्र व प्रोफेसर सुनते हैं।
आसपास ग्रामीण परिवेश के तमाम छात्र इसे सुनते हैं। और कानपुर देहात में भी कम्युनिटी रेडियो है।
92.7 बिग एफएम, रेडियो मिर्ची 98.3 एफएम, एआइआर रेनबो, रेडियो सिटी, फीवर 95.5 एफएम, रेडियो ज्ञानवाणी 104 एफएम, ऑल इंडिया रेडियो आकाशवाणी एआइआर कानपुर 103.7 एफएम, रेडियो कनपुरिया, वक्त की आवाज जैसे रेडियो स्टेशन भी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, तमिल, मलयालम, तेलगू जैसी अलग-अलग भाषाओं में उपलब्ध हैं।