जानिए इस भारतीय महिला शहज़ादी ख़ान, जिनको यूएई में दे दी गई मौत की सज़ा। मेरी बेटी का फ़ोन 13 फ़रवरी को रात में 11 बजे आया था।
पहले वो रोती रही और फिर बताया कि मुझे अलग सेल में कर दिया गया है।और आज शाम या कल सुबह तक मौत की सज़ा हो जाएगी। उसने कहा कि अब वो बच नहीं पाएगी। और ये उसकी आखिरी कॉल हो सकती है।
शहज़ादी के पिता शब्बीर अहमद ये बताते हुए रोने लगे थे। वो लगातार कह रहे थे कि उनकी बेटी बेगुनाह थी। अब विदेश मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि 15 फ़रवरी को शहज़ादी को मौत की सज़ा दे दी गई है। और उनका अंतिम संस्कार पांच मार्च को अबूधाबी में होगा।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि शह़जादी को मौत की सज़ा दे दी गई है। शहज़ादी की तरफ से कोर्ट में पैरवी कर रहे एडवोकेट माज़ मलिक ने भी बताया कि विदेश मंत्रालय ने उन्हें मृत्यु दंड दिए जाने की कोर्ट में पुष्टि की है।
शहज़ादी दरअसल दिसंबर, 2021 में अबू धाबी गईं थी। और वो अगस्त 2022 से वहां घरेलू सहायक के तौर पर काम कर रहीं थी। और उन पर उस चार महीने के बच्चे की हत्या का आरोप था जिसकी देखभाल का ज़िम्मा भी उन पर था।
शहज़ादी के रिश्तेदारों के मुताबिक, चार महीने के उस बच्चे की मौत ग़लत टीका लगाने से हुई थी।
और उनकी दलील है कि इसीलिए इस मामले में पहले कोई केस नहीं किया गया था लेकिन करीब दो महीने के बाद बच्चे के घरवालों ने इस मामले में केस कर दिया जिसकी वजह से उनकी लड़की फंस गयी।
शहज़ादी के पिता शब्बीर के मुताबिक़, उनकी लड़की 15 दिसंबर 2021 को अबू धाबी गई थी, सात दिसंबर 2022 को जिस बच्चे की वह देखभाल कर रही थी उसकी मौत हो गयी। और फिर 10 फरवरी 2023 को केस कर दिया गया।
मृतक के पिता ने जवाब में लिखा था, “शहज़ादी ने मेरे बेटे को बेरहमी से और जानबूझकर मारा और ये यूएई के अधिकारियों की जांच में साबित भी हो चुका है। एक अभिभावक के रूप में मैं मीडिया से अनुरोध करता हूं कि वो हमारे दर्द को महसूस करें। “
साथ ही शब्बीर का कहना है कि वह बच्चे के परिवार से मिलने के लिए आगरा भी गए थे लेकिन वे लोग उनकी कोई बात सुनने के लिए तैयार नहीं हुए। शब्बीर कहते हैं, “मैं दिल्ली भी गया था विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मिलने लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
शहज़ादी रोज़गार और बेहतर इलाज की उम्मीद में संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी गईं थी। और वो उत्तर प्रदेश के बांदा के गोयरा मोगली गांव की रहने वाली थी।
उनके घर वाले बताते हैं कि वो एक मिलनसार लड़की थी। और उन्हें लोगों से मिलना-जुलना पसंद था। शहज़ादी की मां ने बताया कि उनका चेहरा बचपन में ही जल गया था। शहज़ादी चेहरे के निशान को हमेशा के लिए मिटाना चाहती थीं।
शहज़ादी के पिता शब्बीर ने बताया कि शहज़ादी सोशल मीडिया के ज़रिए आगरा के जिस व्यक्ति के संपर्क में आई थी, उस व्यक्ति ने उसे अपने रिश्तेदार के यहां काम करने के लिए अबू धाबी भी भेज दिया था।
शब्बीर के मुताबिक, 2021 में आगरा के उज़ैर ने शहज़ादी को टूरिस्ट वीजा पर अबू धाबी भेज दिया था, वहां पर वह उज़ैर के रिश्तेदार के घर पर काम करने लगी, जिनके 4 महीने के बच्चे की देखभाल करना उसकी प्रमुख ज़िम्मेदारी भी थी।
और शहज़ादी के पिता ने बताया कि उनकी बेटी नियम से, अबू धाबी से वीडियो कॉल भी करती थी। और कई बार वह 4 महीने के उस बच्चे को भी दिखाती थी जिसकी वह देखभाल करती थी।
और फिर एक दिन अचानक, उसका फोन आना बंद हो गया. बाद में उन्हें अपने रिश्तेदारों से पता चला कि शहज़ादी अबू धाबी की जेल में ही बंद हैं।