Rajasthan : जानिए यहां की अनोखी परंपरा,सज-धज कर बारात लेकर निकलता है दूल्हा, बिन दुल्हन लौटता है वापस

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जानिए राजस्थान की एक ऐसी परंपरा , सज-धज कर बारात लेकर निकलता है दूल्हा, बिन दुल्हन लौटता है वापस। ऐसे ही राजस्थान के बीकानेर में एक परंपरा होली के मौके पर निभाई जाती है, जिसे यहां के लोग पिछले 300 सालों से निभाते आ रहे हैं।

बीकानेर में धुलंडी होली के दिन एक ऐसी बारात निकाली जाती है, जिसमें दूल्हा बिना दुल्हन के ही वापस लौटता है।

ये भी बता दें कि बीकानेर में हर्ष जाती का कोई भी एक युवक इस परंपरा के मुताबिक दूल्हा बनता है, जिसे हर्ष विष्णु के रूप में सजाया जाता है और बारात निकाली जाती है।

हालांकि वापसी पर दुल्हन साथ नहीं आती, लेकिन लोगों का मानना है कि इस परंपरा को करने के बाद जो भी युवक दूल्हा बनता है।

और उसकी शादी एक साल के अंदर ही हो जाती है। और इस साल ऋषि नाम के लड़के को विष्णु रूप में दूल्हा बनाया गया, जिसकी बारात महतो चौक से रवाना हुई।

और हिस्ट्री लेक्चरर मुकेश हर्ष के मुताबिक ये परंपरा 300 साल पुरानी है, जिसे आज तक निभाया जा रहा है। और इसमें बारात जिस जगह से गुजरती है।

वहां का माहौल खुशनुमा भी हो जाता है और शादी जैसा लगता है। धुलंडी के मौके पर निकलने वाली इस अनोखी बारात की खासियत यह है कि दूल्हा हर साल बिना दुल्हन के लौटता है। और फिर भी इस बारात में रौनक पूरी होती है।

और ये बताया मुकेश हर्ष ने कि इस परंपरा में दूल्हा पैदल ही बारात में चलता है, जिसने सिर पर खिड़किया पाग, ललाट पर पेवड़ी और कुमकुम अक्षत तिलक, बनियान और पीताम्बर भी पहना होता है।

और साथ ही गले में फूलों की माला भी पहनी होती है। और बारात में दूल्हे का पूरा परिवार, हर्ष जाति के लोग और उसके मोहल्ले के सभी लोग शामिल होते हैं। और सभी बारातियों की खूब खातिरदारी भी की जाती है।

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