जानिए मुगल के दरबार की वो वैश्या, जिसके नाम पर है कानपुर का ये मोहल्ला। सैयद बंधुओं में सबसे बड़े अब्दुल्ला इतिहास में ‘राजा निर्माता’ के रूप में बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध हैं।
और अब्दुल्ला उस समय सम्राट औरंगजेब की सेना में थे और इलाहाबाद के सूबेदार थे। औरंगजेब दक्कन में युद्ध लड़ने में व्यस्त था, जिसकी मृत्यु 1707 में हुई। और अब्दुल्ला 1713 में जहांदार शाह सम्राट के बाद फरुखसियर का वजीर बने।
सैयद बंधुओं ने 1713 से 1719 के दौरान छह राजा बनाए। छोटा भाई सेनापति था, जिसकी 1720 में मौत हो गई और बड़ा भाई 1722 में मारा गया।
और इसके साथ ही इतिहासकार अनूप शुक्ला बताते है कि 1722 में बादशाह मोहम्मद शाह रंगीला के दरबार में एक वेश्या थीं। और उसका नाम था कोकी जोए। और वह इसी नाम से प्रसिद्ध थीं।
हालांकि, उसका असली नाम रहीमुन्निसा था। और अनूप शुक्ला ये भी बताते हैं कि कानपुर का जूही उसके ही नाम का अपभ्रंश है।
और इसके अलावा रिश्वत के रूप में उसकी उन दिनों प्रतिदिन की आय 25000 रुपये थी, जिसमें बादशाह का भी हिस्सा होता था। कानपुर में गंगा के दक्षिण में कान्हपुर गांव तक, बल्कि वर्तमान कानपुर तक उसकी अमलदारी भी थी।
और कानपुर में उसके द्वारा बनाई गई इमारतों में जूही का बंगला हवाई अड्डे के पास सावदा कोठी, और एक किला जिसमें एक भागने की सुरंग भी है।
इसके साथ ही इतिहासकार अनूप शुक्ला बताते है कि कानपुर का इतिहास काफी पुराना है और यहां के मोहल्लों के जो भी नाम हैं उसके पीछे कोई न कोई रोचक कहानी छुपी हुई है। और उनके अनुसार कोकी जोए की तस्वीर भी बहुत मुश्किल से ही देखने को मिलती है।