क्या नेपाल में फिर लौटेगी राजशाही, समर्थकों पर कार्रवाई के बाद अब क्या होगा?

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यह एआई जनरेटेड फोटो है।

नेपाल में राजशाही और हिंदू राष्ट्र घोषित करने को लेकर समर्थकों में आक्रोश है। जन आंदोलन हिंसक होने के कारण दो लोगों की मौत हो गई। प्रदर्शनकारयों ने कई इमारतों को आग के हवाले किया है। सरकार की ओर से हिंसा के बाद लगातार कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इन सबके बीच यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या नेपाल में फिर राजशाही लौट सकती है। समर्थकों पर कार्रवाई के बाद अब क्या होगा? आज के एक्प्लेनर में यह जानने की कोशिश करते हैं।

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) देश में राजशाही स्थापित करने की मांग कर रही है। जिसके समर्थन में ही नेपाल में आंदोलन हो रहे हैं। दुर्गा प्रसाई को राजशाही आंदोलन का नेता घोषित किया गया है। इस आंदोलन से पहले ‘राजतंत्र पुनर्स्थापना आंदोलन समिति’ का गठन भी किया गया है। सुरक्षा अधिकारियों की मानें तो दुर्गा प्रसाई पुलिस की वांटेड लिस्ट में हैं, जबकि आंदोलन के संयोजक नवराज सुबेदी को घर में नज़रबंद रखा गया है। जबकि हिंसक प्रदर्शन के बाद आरपीपी के दो वरिष्ठ नेताओं को शुक्रवार को गिरफ़्तार कर लिया गया।

वहीं नेपाल में हुई हिंसा को लेकर यहां की सरकार ने कार्रवाई की है। सरकार ने इस हिंसा में हुए नुक़सान की वसूली पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह से करने की योजना बनाई है। वहीं राजशाही समर्थक ज्ञानेंद्र शाह की सिक्योरिटी भी घटा दी गई है। ज्ञानेंद्र शाह की सुरक्षा में लगे 25 सुरक्षा कर्मियों को कम करके अब 16 कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जो सुरक्षाकर्मी उनकी सुरक्षा की ड्यूटी में लगे थे, उन सबको बदल दिया गया है।

वहीं, काठमांडू नगर निगम ने भी राजा ज्ञानेंद्र शाह को नुकसान की भरपाई का नोटिस दिया है। इस नोटिस के मुताबिक़ उन्हें ज़ुर्माने के रूप में नेपाली 7.93 लाख नेपाली रुपये  देने होंगे।

समझिये यह था पूरा मामला
28 मार्च की सुबह क़रीब  साढ़े 11 बजे काठमांडू के तिनकुने इलाक़े में राजशाही समर्थक रैली शुरू हुई। यह रैली संसद भवन की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रही थी, जहां निषेधाज्ञा लागू थी। प्रदर्शनकारी पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के समर्थन में 2008 में समाप्त किए गए राजतंत्र की बहाली की मांग कर रहे थे। धीरे-धीरे यह प्रदर्शन उग्र हो गया और कई घरों, इमारतों और दुकानों को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें, आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां चलाईं। इस दौरान दो लोगों की मौत हो गई। जबकि 15 से ज़्यादा लोग घायल हो गए। इसके बाद से सरकार और पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। बता दें, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के एकीकृत समाजवादी पार्टी के दफ़्तर में भी आग लगा दी गई थी। यह दफ़्तर पूरी तरीके से जलकर खाक हो गया है।

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