सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून पर आज होगी सुनवाई, जानिए सरकार द्वारा हलफनामे के बारे में

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सुप्रीम कोर्ट वक्फ संशोधन अधिनियम की वैधता को चुनौती देनेवाली याचिकाओं पर आज मुख्य रूप से सुनवाई करेगा, जिसमें तर्क दिया गया है कि यह असंवैधानिक भी है।

और सरकार ने आश्वासन दिया कि किसी भी वक्फ संपत्ति को गैर-अधिसूचित नहीं किया जाएगा और वक्फ बोर्ड में किसी गैर-मुस्लिम को नियुक्त भी नहीं किया जाएगा।

साथ ही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर इस कानून की आवश्यकता और औचित्य को स्पष्ट भी किया है। और सरकार ने कहा कि वक्फ कानून में संशोधन का उद्देश्य इसकी आड़ में हो रहे निजी और सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकना भी है।

केंद्र सरकार ने कहा कि वक्फ बाय यूजर की व्यवस्था खत्म होने से मुस्लिम समुदाय का वक्फ करने का अधिकार नहीं छीना गया है, बल्कि कानून के दुरुपयोग पर लगाम ही लगाई गई है।

साथ ही सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि इस कानून को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता अदालत को गुमराह करने की कोशिश भी कर रहे हैं।

और सरकार ने कहा कि प्रमुख राजनीतिक दलों के सदस्यों वाली संसदीय समिति के बहुत व्यापक, गहन और विश्लेषणात्मक अध्ययन करने के बाद ये संशोधन भी किए गए हैं।

इसके अलावा कुछ सप्ताह पहले सरकार ने शीर्ष अदालत के प्रश्नों के मद्देनजर इस विवादास्पद कानून के दो मुख्य बिंदुओं के कार्यान्वयन पर रोक भी लगा दी थी।

और केंद्र ने 17 अप्रैल को न्यायालय को सूचित किया था कि वह मामले की सुनवाई की अगली तारीख पांच मई तक ‘‘वक्फ बाय यूजर” सहित अन्य वक्फ संपत्तियों को गैर-अधिसूचित नहीं करेगा।

और न ही केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्ड में कोई नियुक्तियां भी करेगा। और केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ से कहा था कि संसद द्वारा उचित विचार-विमर्श के बाद पूरी तरह से पारित कानून पर सरकार का पक्ष सुने बिना रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।

साथ ही सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि पहले से पंजीकृत या अधिसूचना के माध्यम से घोषित वक्फ संपत्तियों, जिनमें ‘वक्फ बाय यूजर’ भी शामिल है। और उस को अगली सुनवाई की तारीख तक न तो छेड़ा जाएगा

और न ही गैर अधिसूचित भी किया जाएगा। और फिर इसके बाद पीठ ने केंद्र को कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर प्रारंभिक जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई पांच मई के लिए ही तय की गई।

ये भी बता दें कि उच्चतम न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ सोमवार को पांच याचिकाओं पर सुनवाई भी करेगी।

और साथ ही याचिकाओं के इस समूह में एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दायर एक याचिका भी संयुक्त रूप से शामिल है।

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