पहलगाम हमले का मकसद कश्मीर घाटी में पूरी तरह से दहशत फैलाना था। इसके साथ ही आतंकियों ने महिलाओं के सामने उनके पतियों के सिर में गोली मारी थी।
और ये बहुत गहरे जख्म हैं, जिन्हें वो महिलाएं कभी नहीं भुला पाएंगी, जिन्होंने अपना सुहाग इस हमले में खो दिया। और फिर ऐसे में जब भारत ने इन आतंकियों को जवाब दिया, तो ऑपरेशन का नाम सिंदूर रखा। साथ ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से बेहतर नाम इस हमले शायद हो ही नहीं सकता था।
और ये ऑपरेशन उस सिंदूर का बदला है, जो बैसरन घाटी में सुहागनों के माथे से पोंछ दिया गया और उनकी मांग सूनी कर दी गई थी।
इतना ही नहीं हलगाम की बैसरन घाटी में आतंकियों ने धर्म पूछकर गोली मारी थी। और साथ ही सिर्फ पुरुषों को टारगेट किया गया था। और आतंकियों का मकसद महिलाओं के सामने उनके सिंदूर को पोंछना था।
और भारतीय संस्कृति में सिंदूर महिलाएं अपने सुहाग यानी पति की लंबी उम्र के प्रतीक के रूप में लगाती हैं।
और बैसरन घाटी में आतंकी जब पुरुषों को गोली मार रहे थे, तो उनके परिवारवालों को ये कह रहे थे- जाओ, अपनी सरकार को बता देना… इससे साफ था कि आतंकियों को अपने आकाओं से साफ-साथ निर्देश मिले थे कि सिर्फ सिंदूर मिटाना है।
यानि हिंदुओं को टारगेट करना है, भारतीय सेना ने भी अब चुन-चुनकर आतंकियों के ठिकानों को नष्ट किया है। साथ ही भारत ने भी आतंकियों को कड़ा संदेश दिया है कि आतंकी कहीं भी छिप जाएं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
ये भी बता दें कि हाथों में चूड़ा और माथे पर सिंदूर… बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को कई नए जोड़े भी घूमने के लिए आए थे, जिनकी नई-नई शादी हुई थी।
और एक महिला की तो कुछ दिनों पहले ही शादी हुई थी। और इस महिला को अपने पति के शव के साथ बैठे देख लोगों की आंखों में आंसू आ गए थे। और इन महिलाओं के दुख को पूरे ने महसूस भी किया था।
साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हमले के बाद कहा था कि आतंकियों को बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही भारतीय ने सेना ने देश के लोगों के आंसुओं का बदला ऑपरेशन सिंदूर से लिया गया है।