तपुड़ा टाइगर रिजर्व में मढ़ई के जंगल में बाघ के मुंह से साथी चौकीदार की बहादुरी से जान बचाने वाले जांबाजा रामदास को इस बात का सुकून है कि उसने बहादुरी दिखाकर साथी की जान बचा ली।
और बाघ के चंगुल से छुड़ाने के बाद भी खौफ का साया कम नहीं हुआ। और आधा घंटे तक बाघ दोनों चौकीदारों पर फिर से हमले की फिराक में घेरे रहा।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मढ़ई के कोर एरिया के लागदा कैंप में चौकीदार बृजेंद्र टेकाम पर बाघ ने हमला कर दिया। और वहां मौजूद चौकीदार रामदास इवने जोकि बृजेंद्र का जीजा भी हैं।
उसने बाघ से डटकर मुकाबला किया और अपने साले को बचा लिया। और आधे घंटे का संघर्ष का समय बहुत खौफनाक रहा। बाघ के हमले में बृजेंद्र के कंधे एवं पीठ पर चोट भी आईं। और उसका जिला अस्पताल में इलाज भी जारी है।
इसके अलावा जांबाज चौकीदार रामदास बताते हैं “मेरे द्वाराा जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनकर बाघ भाग गया। और मैंने जैसे तैसे करके अपने साले को टाइगर से छुड़ाया और कैंप में लेकर आया।
और तभी बिजेंद्र ने बोला कि मुझे पानी लाकर दो। मैं पानी लेने के लिए बाहर निकला तो टाइगर कैंप के बाहरी ही खड़ा भी था। और मैंने तुरंत बाहर से पानी लेकर अंदर घुसा और गेट लगा भी लिया। और हम दोनों अंदर कैंप में हो गए।
और फिर रेंजर पीएन ठाकुर को फोन लगाया और गाड़ी लेकर आने के लिए कहा। और हमने बताया कि बिजेंद्र पर टाइगर ने हमला कर दिया है।
और फिर इसके बाद मढ़ई फोन लगाकर गाड़ी बुलाई। और कैंप में अंदर जिस जगह पर नेटवर्क आता था, उसी के पास टाइगर का मूवमेंट भी बना हुआ था।
और फिर कैंप के बाहर टाइगर घात लगाए बैठा था। जहां मेरी छांव जा रही थी, वहीं टाइगर भी खड़ा था। और फिर करीब आधे घंटे तक टाइगर वहीं खड़ा रहा।
जब कैंप के पास गाड़ी पहुंची तो उन्हें बताया गया कि टाइगर यहीं पर है। और फिर गाड़ी में जितेंद्र धुर्वे, संजू धुर्वे, ओम प्रकाश धुर्वे, दीपक धुर्वे ड्राइवर थे।
गाड़ी के पास टाइगर भी खड़ा था। और उन्होंने गाड़ी को उसके आगे किया बाघ को भगाया। और इसके बाद घायल बिजेंद्र को गाड़ी से लेकर अस्पताल लेकर पहुंचे। “