13 जून को ईरान पर इसराइली हमले के बाद अब यह आशंका जताई गई थी कि होर्मुज़ स्ट्रेट बंद हो सकता है।
और साथ ही यह स्ट्रेट दुनियाभर में गैस और तेल की आपूर्ति के लिए रणनीतिक रूप से बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है।
साथ ही जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट एक सँकरी समुद्री पट्टी होती है, जो दो बड़े जल क्षेत्रों, जैसे समुद्रों या महासागरों को आपस में जोड़ती है।
और होर्मुज़ स्ट्रेट मध्य पूर्व के तेल भंडार वाले देशों को एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका समेत दुनिया के अन्य हिस्सों से भी जोड़ता है।
साथ ही एशियाई बाज़ारों में सोमवार को कारोबार की शुरुआत के साथ ही ब्रेंट क्रूड ऑयल की क़ीमत में दो डॉलर से अधिक यानी 2.8% की बढ़ोतरी दर्ज़ की गई, जिससे यह 76.37 डॉलर प्रति बैरल पर भी पहुँच गई।
और अमेरिकी कच्चे तेल की क़ीमत भी लगभग दो डॉलर बढ़कर 75.01 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित होर्मुज़ स्ट्रेट, ईरान और ओमान की समुद्री सीमा के बीच भी आता है।
और यह एक सँकरा जल मार्ग है, जो एक जगह तो केवल 33 किलोमीटर ही चौड़ा है।साथ ही इसके महत्व का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पाँचवाँ हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुज़रता है।
और सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और ईरान जैसे देशों से निर्यात होने वाला कच्चा तेल इसी स्ट्रेट से होकर अन्य देशों तक पहुँचता है.
और इसके अलावा, दुनिया में सबसे अधिक लिक्विफ़ाइड नेचुरल गैस निर्यात करने वाला देश क़तर भी अपने निर्यात के लिए इसी रास्ते पर ही निर्भर है।
और
साल 1980 से 1988 तक चले ईरान-इराक़ युद्ध के दौरान, दोनों देशों ने इसी जल मार्ग में एक-दूसरे की तेल आपूर्ति को रोकने की कोशिश भी की गई थी।
साथ ही इस संघर्ष में कमर्शियल टैंकरों पर हमले किए गए, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर भी पड़ा।
हालांकि, इसराइली हमले के बाद ईरान ने स्पष्ट किया था कि उसकी तेल आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है।
लेकिन तेल मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि हमलों में तेल भंडारण केंद्रों या रिफ़ाइनरियों को निशाना नहीं बनाया गया।
लेकिन अगर विश्लेषकों का मानना है कि अगर संघर्ष बढ़ा, तो भविष्य में इस बुनियादी ढाँचे पर हमला संभव है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर झटका भी लग सकता है।