राज्य सरकार ने अब आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटियों के विवाह के लिए सामूहिक विवाह योजना की निगरानी सख्त करने के मुख्य निर्देश दिए हैं।
कन्या के आधार सत्यापन में लापरवाही पर जिम्मेदार अफसरों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। फिर इसके साथ ही विवाह स्थल पर वर-वधू दोनों की बायोमीट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य होगी, ताकि फर्जीवाड़ा को रोका जा सके।
शादी में दी जाने वाली उपहार सामग्री, जलपान और भोजन आदि के मानक तैयार कर उनका सख्ती से पालन भी करवाया जाएगा।
फिर यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि, एक ही स्थान पर 100 या उससे अधिक जोड़ों की शादियों की स्थिति में संबंधित जिलाधिकारी स्वयं मौजूद रहेंगे।
समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण के मुताबिक, राज्य सरकार की मंशा है कि योजना का लाभ पात्र परिवार आसानी से ले सकें। और इसके लिए कई स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं।
योजना में लाभार्थियों को दिए जाने वाले उपहारों की गुणवत्ता और आपूर्ति में पारदर्शिता के लिए अब फर्मों के चयन की प्रक्रिया निदेशालय स्तर से की जाएगी, ताकि जिला स्तर पर किसी तरह की अनियमितता भी न हो।
साथ ही विवाह समारोह में मंडलीय उपनिदेशकों और जिला समाज कल्याण अधिकारियों की उपस्थिति मुख्य रूप से अनिवार्य होगी।
एक जिले के अधिकारी दूसरे जिले में आब्जर्वर के रूप में नामित कर भेजे भी जाएंगे। साथ ही समारोह में किसी भी अनियमितता की स्थिति में ये अधिकारी सीधे निदेशालय या मंडलीय उपनिदेशक को रिपोर्ट भी करेंगे।
योजना के प्रभारी उप निदेशक, समाज कल्याण आरपी सिंह ने ये भी बताया कि इस साल करीब एक लाख जोड़ों का विवाह करवाए जाने का मुख्य लक्ष्य है।