जानिए आखिर नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है? और इसका कारण और महत्व

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हिंदू पंचांग के मुताबिक हर साल सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर नाग पंचमी पूर्ण रूप से मनाई जाती है, जो कि इस बार 29 जुलाई, मंगलवार को मनाई जाएगी।

और यह पर्व देश के कई राज्यों में बहुत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। और फिर कुछ जगहों पर यह पर्व शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाते हैं, तो कहीं कृष्ण पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी मनाने की परंपरा भी है। और फिर इस दिन विधि-विधान से नाग देवता की पूजा भी की जाती है।

साथ ही धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवता की आराधना करने से कुंडली में मौजूद काल सर्प दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में खुशहाली भी आती है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि आखिर नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?

इसके अलावा हिंदू धर्म शास्त्रों में नाग पंचमी से जुड़ी कई कहानियां मिलती हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्द कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई भी है।

और फिर पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल में राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने नागों से अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए एक सर्प यज्ञ किया था।

और फिर जिससे नागों का विनाश भी होने लगा। और फिर तब उनकी मां उत्तरा की विनती पर ऋषि आस्तिक ने यज्ञ को रोककर नागों की रक्षा की।

और फिर जिस दिन यह हुआ, वह सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी। और फिर तभी से सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर नाग पंचमी मनाई जाने लगी और इस दिन नागों की आराधना करने की परंपरा भी शुरू हुई।

इतना ही नहीं एक अन्य कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान वासुकी नाग ने रस्सी बनकर देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन में सहयोग दिया था।

और फिर वहीं, गरुड़ पुराण में भी नागों की पूजा को पितरों की शांति और वंश वृद्धि से जोड़ा भी गया है। और फिर इसलिए नाग पंचमी के दिन सर्पों की पूजा के साथ ही उन्हें जल, दूध और अन्य चीजें अर्पित करते हैं।

और फिर ऐसा माना जाता है कि सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नाग लोक में विशेष उत्सव भी होता है।

और धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन जो भी व्यक्ति नागों को गाय के दूध से स्नान कराता है, तो सभी नाग उसके कुल को अभय भी दान देते हैं और साथ ही उसके परिवारजनों को सर्प का भय नहीं रहता है।

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