आज के दौर में जिस तरह महिलाएं अब हर क्षेत्र में पुरुषों से आगे निकलती जा रही हैं, उसी तरह परिवार नियोजन का जिम्मा भी उन्होंने अपने कंधों पर लिया हुआ है।
और फिर जिले में परिवार नियोजन की भागीदारी में पुरुष फिसड्डी हैं। यहां महिलाएं ही ज्यादा जागरूक हैं और जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।
साथ ही स्वास्थ्य विभाग के पिछले तीन साल के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। और फिर इस दौरान आठ हजार नसबंदी ऑपरेशन किए गए।
और फिर इनमें से करीब 90 प्रतिशत से भी ज्यादा महिलाओं ने कराए हैं। तकनीक उपलब्ध होने के बाद भी परिवार नियोजन का भार महिलाएं ही ज्यादा उठा रही हैं।
साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि परिवार नियोजन में महिलाएं, पुरुषों से ज्यादा जागरूक हैं।
इसके अलावा नसबंदी के अलावा बच्चों में अंतर रखने की विधि पीपीआईयूसीडी भी महिलाएं अपना रही हैं। और फिर इसके अलावा अंतरा इंजेक्शन भी ले रही हैं।
आगे उन्होंने बताया कि महिला चिकित्सालय, मेडिकल कॉलेज, मवाना, सरधना और दौराला सीएचसी पर नसबंदी कराई जाती है।
इसके लिए जागरुकता अभियान भी समय-समय पर चलाए जाते हैं, लेकिन पुरुषों में इसे लेकर उत्साह बहुत कम है।
और फिर स्वास्थ्य विभाग अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहा है। और फिर जिले में हर साल का लक्ष्य 10 हजार नसबंदी का है, लेकिन यह किसी भी साल पूरा नहीं हुआ है।
और इसके लिए लाभार्थी को तीन हजार रुपये और प्रेरक को चार सौ रुपये दिए जाते हैं। पहले यह क्रमशः दो हजार रुपये और तीन सौ रुपये दिए जाते थे।

