रुपये में भारी गिरावट की चिंताओं के बीच चलते हुए अब भारतीय रिज़र्व बैंक ने ब्याज़ दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत तक कर दिया है।
और फिर इससे उम्मीद की जा रही है कि लोन सस्ता हो सकता है, जिसमें आवास, ऑटो और कमर्शियल लोन भी शामिल हैं।
इसके साथ ही आरबीआई गवर्नर ने ये भी कहा कि खुदरा महंगाई में कमी के कारण अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए ज़्यादा गुंजाइश भी मिल पाई है।
और फिर वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत जबकि मुद्रास्फीति यानी महंगाई का अनुमान 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत तक कर दिया गया।
इसके अलावा आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 686 अरब डॉलर पर है, जो 11 महीनों के आयात के लिए काफ़ी है।
और फिर अन्य बैंक रिजर्व बैंक से लिए पैसे पर जो ब्याज़ चुकाते हैं, वो रेपो रेट भी शामिल है।
और इसके साथ ही रेपो रेट कम होने से बैंकों पर दबाव कम होगा, जिसका असर ये होगा कि वे ब्याज दरों में कटौती भी कर सकते हैं।
और फिर ऐसा होने से बैंकों से लिए गए कर्ज़ पर चुकाई जाने वाली मासिक क़िस्तों में कुछ कमी भी हो सकेगी।