ढाई सौ साल पुरानी दिल्ली की सफेद संगमरमर वाली फैज-ए इलाही मस्जिद, जानें क्यों नमाज के लिए नहीं हुआ था निर्माण

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राजधानी दिल्ली अपनी ऐतिहासिक इमारतों और अनकही कहानियों के लिए ही जानी जाती है। और फिर इन दिनों दिल्ली की फैज-ए इलाही मस्जिद चर्चा का केंद्र भी बनी हुई है।

और हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद MCD ने इस मस्जिद के आसपास से अवैध अतिक्रमण भी हटाया गया है।

क्योंकि समय के साथ इस ऐतिहासिक धरोहर के आसपास दुकानें, अस्थायी ढांचे और अवैध निर्माण खड़े भी हो गए थे।

हालांकि, इस कार्रवाई का कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध किया और इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़ने की कोशिश भी की गई।

और फिर वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह कदम विरासत संरक्षण और कानून के पालन के तहत उठाया गया है। फिर जिसके बाद से फैज-ए इलाही मस्जिद खबरों में है।

और फिर MCD की कार्रवाई के बाद लोग जानना चाहते हैं कि इस मस्जिद का इतिहास क्या रहा है?

दरअसल, सफेद संगमरमर से बनी यह खूबसूरत मस्जिद 250 साल से भी ज्यादा पुरानी है और इसके निर्माण के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प भी है।

और फिर मस्जिद के इतिहास से जुड़ा तथ्य यह है कि इसका निर्माण मुख्य रूप से नमाज के लिए नहीं किया गया था।

फिर इस मस्जिद का निर्माण महान सूफी संतहजरत शाह फैज-ए-इलाही ने ही करवाया था।

और फिर इतिहासकारों के अनुसार, फैज-ए इलाही मस्जिद का निर्माण मूल रूप से रूहानी तालीम यानी आध्यात्मिक शिक्षा के केंद्र के रूप में ही किया गया था।

और फिर सरल शब्दों में समझें तो मरकज के लिए बनाया ही गया था। और फिर इसका संबंध सूफी संतों और आध्यात्मिक शांति की तलाश करने वालों से था।

और यहां विद्वान और जिज्ञासु धर्म और दर्शन पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा होते थे। और फिर मस्जिद की वास्तुकला में सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है।

जो इसकी पवित्रता और शांति का प्रतीक भी माना जाता है। इसके अलावा फैज-ए इलाही मस्जिद का वजूद दिल्ली के उस दौर से है जब शहर कई तरह के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों से गुजर ही रहा था।

और फिर मस्जिद की गुंबदें और मीनारें मुगल काल की बारीक कारीगरी को दर्शाती हैं। फिर यह मस्जिद केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि दिल्ली की मिश्रित संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी रही है।

और फिर वक्त के साथ इसके आसपास घनी आबादी बस गई और धीरे-धीरे अवैध निर्माण ने इस ऐतिहासिक धरोहर को घेर लिया, जिसे अब हटाया भी गया है।

इसके अलावा दिल्ली के सीने में दफन यह मस्जिद आज भी मुगल काल की भव्यता की कहानी सुनाती है।

और फिर यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि पत्थरों पर उकेरी गई एक इबादत भी है। फिर इसके निर्माण में लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर का प्रयोग भी किया गया है।

और फिर इसकी बनावट की सबसे बड़ी खूबी इसका अंदरूनी हिस्सा है। और फिर जिसे वैज्ञानिक तरीके से बनाया गया है कि तपती गर्मी में भी यहां सुकून भरी ठंडक भी बनी रहती है।

और फिर वहीं मस्जिद की दीवारों पर कुरान की आयतों को इतनी खूबसूरती से भी उकेरा गया है।

और फिर वक्त बदला, दौर बदला, लेकिन इस मस्जिद की गरिमा आज भी बरकरार है। इसके साथ ही वर्तमान में इसकी कमान दिल्ली वक्फ बोर्ड के हाथों में है।

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