मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजा नोटिस, जानें क्या पूछा

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माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला पुलिस और प्रशासन द्वारा ही कथित तौर पर यह रोके जाने को लेकर जारी विवाद के बीच मेला प्रशासन ने उन्हें एक नोटिस भी जारी किया।

और फिर यह पूछा है कि वह स्वयं को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रचारित कर रहे हैं।

इसके साथ ही प्रयागराज मेला प्राधिकरण उपाध्यक्ष की ओर से सोमवार जारी नोटिस में उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन सिविल अपील का भी उल्लेख किया गया है।

फिर जिसमें न्यायालय ने आदेश दिया था कि जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित भी नहीं हो सकता।

और फिर नोटिस में कहा गया है कि इससे अद्यतन स्पष्ट है कि कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं किया गया है।

फिर बावजूद इसके प्रयागराज माघ मेला 2025-26 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर ही स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित व प्रदर्शित भी किया गया है।

इसके साथ ही नोटिस में कहा गया है कि आपके इस कृत्य/प्रदर्शन से माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना भी दर्शित हो रही है।

इस पत्र की प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर ही स्पष्ट करें कि आपके द्वारा अपने नाम के सम्मुख शंकराचार्य शब्द का प्रयोग कैसे किया जा रहा है।

और फिर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा।

कि ‘उच्चतम न्यायालय के आदेश से पूर्व ही महाराज जी का ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के तौर पर पट्टाभिषेक भी हो चुका था।

और फिर योगीराज ने कहा, मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर शंकराचार्य जी अपनी पालकी में बैठकर शांतिपूर्वक अपने अनुयायियों के साथ संगम स्नान करने जा रहे थे।

और फिर पुलिस ने स्वामी जी को पालकी से उतरकर स्नान घाट जाने को भी कहा।फिर उन्होंने दावा किया कि पालकी से उतरने से मना करने पर पुलिस ने उनके समर्थकों को मारा-पीटा जिसमें करीब 15 समर्थक घायल हुए।

और उन्होंने कहा कि ‘सभी घायलों की चिकित्सा जांच करायी गई है और स्वामी जी पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराएंगे।

और फिर योगीराज ने कहा कि जब तक मेला प्रशासन माफी मांग कर ”स्वामी जी” को प्रोटोकॉल के हिसाब से स्नान की व्यवस्था नहीं करता, वह अपने शिविर में प्रवेश भी नहीं करेंगे।

फिर वहीं, मेलाधिकारी ऋषिराज का कहना है कि वे लोग बैरिकेट तोड़कर संगम नोज पर आए और भगदड़ की स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने यह कदम भी उठाया।

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