बच्चों को बहलाने के लिए अब फोन थमा देने का एक दुष्प्रभाव और भी ज्यादा सामने आया है।
मोबाइल की स्क्रीन घंटों लगातार देखने से बच्चों के मस्तिष्क का सिस्टम हैंग हो रहा है। फिर इससे मस्तिष्क कुछ सीख नहीं पाता।
और फिर घबराए अभिभावक बच्चों को लेकर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज न्यूरो साइंसेस विभाग आ रहे।
एमआरआई जांचों में बच्चों के मस्तिष्क की रिपोर्ट सामान्य आ रही है लेकिन सभी लक्षण ऑटिज्म के ही रहते हैं।
इसके साथ ही मस्तिष्क पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का अध्ययन करने के लिए न्यूरो साइंसेस विभाग ने 65 बच्चों की केस स्टडी तैयार की है।
फिर इन बच्चों को ओपीडी में लाया गया है। ये बच्चे ऑटिज्म के लक्षणों से ग्रसित रहे हैं। और इनकी हिस्ट्री ली गई तो पता चला कि 90 फीसदी बच्चे मोबाइल के लती हैं।
यह भी पाया गया कि इन्हें फोन देखने की लत उनके घर वालों ही लगाई है। बच्चे रोएं, शोर न करें, इसके लिए गेम लगाकर फोन भी थमा दिया जाता है।
और फिर बच्चों की मस्तिष्क का साइज सामान्य रहता हैं जबकि असली ऑटिज्म रोगी का मस्तिष्क का साइज छोटा मिलता है। इसके अलावा अन्य माइग्रेशनल डिफेक्ट भी एमआरआई जांच में भी आते हैं।
इसके अलावा न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने ये भी बताया कि स्क्रीन की लत से मस्तिष्क पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर गुड़गांव स्थित ब्रेन रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ ही मिलकर शोध करने की तैयारी है।
फिर इसके साथ ही अमेरिका के न्यूरो साइंसेस के क्लीवलैंड क्लीनिक और जापान के विश्वविद्यालयों से भी बात भी चल रही है।