कानपुर में अब साइबर और इलेक्ट्रानिक युद्धों के मोर्चे पर आइआइटी अब भारतीय सेना का भरोसेमंद साथी बनेगा।
फिर इसके लिए संस्थान के इंजीनियर व विज्ञानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, साइबर सुरक्षा, मानव रहित आटोनामस सिस्टम्स जैसी तकनीक का पूर्ण विकास भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर करेंगे।
इसके साथ ही भारतीय सेना और आइआइटी कानपुर के बीच इस सिलसिले में जल्द ही एक समझौता भी हो सकता है।
और फिर मंगलवार को आइआइटी पहुंचे भारतीय सेना के उप सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने आइआइटी निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल से मुलाकात के दौरान इसके संकेत भी दिए हैं।
इसके अलावा उप सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने निदेशक प्रो. अग्रवाल के साथ ही डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. तरुण गुप्ता और नोडल फैकल्टी प्रभारी प्रो. कांतेश बलानी के साथ एक अहम बैठक में रक्षा क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान व नवाचारों के बारे में पूर्ण जानकारी भी हासिल की है।
और फिर उप सेनाध्यक्ष ने भारतीय सेना में तकनीक आधारित आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया।
आइआइटी निदेशक ने ये भी बताया कि भविष्य में सीमा पर साइबर और इलेक्ट्रानिक युद्ध होंगे।
फिर इसके लिए सेना को तकनीक से मजबूत किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
एआइ, आटोनामस सिस्टम्स जैसी नई तकनीकें सैन्य संचालन के तरीकों में बदलाव के लिए पूर्ण रूप से तैयार हैं।
और फिर उप सेनाध्यक्ष आइआइटी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के नवाचारों में खासी दिलचस्पी दिखाई।
प्रो. अभिषेक ने उन्हें मानवरहित हेलीकाप्टर, वीटीओएल और प्रो. सुब्रमण्यम सडरेला ने यूएवी अनुसंधानों के बारे में भी बताया।
और फिर इतना ही नहीं आपदा, युद्ध और सर्विलांस में कारगर ड्रोन के माडलों और आत्मघाती ड्रोन की बारीकियां भी बताई।
साथ ही सीआइ हब के विशेषज्ञ मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी डा. रस द्विवेदी व मुख्य रणनीति अधिकारी डा. आनंद हांडा ने साइबर सुरक्षा प्रणालियों के बारे में भी बताया गया।