योगी सरकार उत्तर प्रदेश को हरित और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में ही तेजी से आगे बढ़ रही है।
और फिर अतिरिक्त ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए लगभग 2,104 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में दो गुने से अधिक है।
फिर यह प्रावधान राज्य की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
साथ ही राज्य सरकार द्वारा लागू उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022, उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 और उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत आगामी पांच वर्षों में 22,000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित भी किया गया है।
और फिर यह लक्ष्य प्रदेश को पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
और फिर पूरे प्रदेश में अब तक 2,815 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित भी की जा चुकी हैं।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि नीति निर्माण के साथ-साथ क्रियान्वयन स्तर पर भी सरकार सक्रिय भी है।
और फिर पीएम कुसुम सूर्यघर योजना को प्रदेश में सघन रूप से लागू किया जा रहा है। बजट में इसके लिए 1,500 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
इससे किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गति भी मिलेगी।
साथ ही उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत प्रदेश में 36 सीबीजी संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं।
फिर इससे अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ ईंधन उत्पादन दोनों को बढ़ावा मिला है।और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने अग्रणी कदम उठाया है।
ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को स्वीकृति भी प्रदान की गई है।
फिर यह पहल भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देगी।
इसके अलावा वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा कि कृषि, मत्स्य, उद्यान, दुग्ध विकास, खाद्य-रसद पर खास फोकस है।
और पुरे बजट में कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपय का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 20% अधिक है।
साथ ही सरकार ने 2026-27 में 753.55 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न और 48.18 लाख मीट्रिक टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
और फिर कृषकों के डीजल पंप सेट को सोलर पम्प में परिवर्तित करने के लिए 637.84 करोड़ रुपये खर्च करने का एलान किया गया।
इसके अलावा यूपी एग्रीज परियोजना के तहत एग्री-एक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिए ₹245 करोड़ तथा किसान उत्पादक संगठनों के लिए ₹75 करोड़ का रिवॉल्विंग फंड प्रस्तावित है।
और फिर एक्वा कल्चर अवसंरचना के अंतर्गत विश्वस्तरीय हैचरी व प्रशिक्षण केंद्र के लिए ₹155 करोड़ की बाह्य सहायता परियोजना भी शामिल है।
इसके साथ ही किसानों के डीजल पंप सेट को सोलर पंप में बदलने के लिए ₹637.84 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
और फिर नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के लिए ₹298 करोड़ रखे गए हैं। निजी नलकूपों को निर्बाध बिजली आपूर्ति हेतु ₹2,400 करोड़ प्रस्तावित भी हैं।