अधिकारियों का गजब तर्क, 2332 किलो ड्रग्स गायब, कहा कि चूहे गटक गए

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गुजरात विधानसभा में हाल ही में हुए पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने राज्य के गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

और फिर रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस हिरासत में रखा गया हजारों किलोग्राम नशीला पदार्थ भी गायब है।

और फिर जब इस बारे में जवाब मांगा गया, तो गृह विभाग ने जो तर्क दिए। और फिर उन्हें सुनकर हर कोई दंग भी रह गया।

और विभाग का कहना है कि जब्त किया गया नशा या तो चूहे खा गए या फिर नमी के कारण उसका वजन भी कम हो गया।

इसके साथ ही अक्टूबर 2022 से जुलाई 2023 के बीच गुजरात पुलिस ने कुल 6510.54 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त भी किया गया था।

और फिर नियम के मुताबिक, जब्त किए गए नशे को नष्ट भी किया जाना चाहिए। लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि केवल 4177.86 किलोग्राम ड्रग्स ही नष्ट किया गया।

और अब सवाल यह है कि बाकी बचा 2332.68 किलोग्राम नशीला पदार्थ कहां गया? यह कुल जब्ती का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा भी है। और फिर जो पुलिस कस्टडी से रहस्यमयी तरीके से गायब भी है।

और फिर विभाग के अनुसार, हरे भांग और अफीम के पौधों को जब जब्त भी किया जाता है, तो उनमें नमी होती है।

और फिर समय के साथ नमी सूख जाने के कारण उनके वजन में भारी कमी भी आ जाती है।

और फिर गृह विभाग ने यह भी स्वीकार किया कि लगभग 1.44 लाख किलोग्राम मारिजुआना चोरी हो गया है।

साथ ही सीएजी ने गृह विभाग के इन दावों पर गहरा संदेह भी व्यक्त भी किया गया है। और फिर रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 35 प्रतिशत जैसे बड़े हिस्से का गायब भी होना।

केवल प्राकृतिक कारणों या चूहों की वजह से संभव भी नहीं लगता। और फिर ऑडिट में इस बात पर जोर भी दिया गया है।

 गायब हुए मादक पदार्थों की उचित ट्रैकिंग की जानी चाहिए और सुरक्षा के लिए अधिक सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।

और फिर इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद गुजरात विधानसभा में विपक्ष ने सरकार को भी घेरा है।

और फिर सवाल उठाया जा रहा है कि अगर पुलिस कस्टडी में ही ड्रग्स सुरक्षित नहीं है। तो राज्य में नशा मुक्ति अभियान कैसे सफल होगा?

रिपोर्ट ने मादक पदार्थों के भंडारण और निगरानी तंत्र में मौजूद गंभीर खामियों को उजागर भी कर दिया गया है।

इसके साथ ही सीएजी ने निर्देश दिया है कि हर जब्त माल की ट्रेल और स्टोरेज का सरकारी रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से ही रखा जाए।

और फिर यह खुलासा न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी है। बल्कि नागरिकों के बीच भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर अविश्वास भी पैदा करता है।

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