ईरान-अमेरिका के टकराव भले ही मिडिल ईस्ट के आसमान में गूंज रहा हो, लेकिन उसकी आहट भारत के बाजारों, फैक्ट्रियों और घरों तक साफ साफ़ सुनाई देने लगी है।
और फिर यह सिर्फ एक जंग नहीं, बल्कि सप्लाई चेन पर पड़ा ऐसा झटका है। जिसने रोजमर्रा की जिंदगी को उलझा भी दिया है।
और फिर तेल और गैस की लाइनों में आई रुकावट ने एक-एक कर कई इंडस्ट्री की सांसें फुला दी हैं।
और फिर कहीं सड़क बनाने के लिए डामर कम भी पड़ रहा है, कहीं बीयर की कैन गायब होने की भी खबरें भी हैं, तो कहीं कंडोम और पैकेजिंग तक पर संकट भी खड़ा हो गया है।
और फिर दरअसल, यह असर सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसी ‘चेन रिएक्शन’ भी बन चुका है, फिर जिसमें कच्चे माल से लेकर तैयार सामान तक हर कड़ी कमजोर भी पड़ रही है।
और फिर सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि जंग कितनी लंबी चलेगी, बल्कि यह है कि इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जिंदगी को कितनी गहराई तक झकझोर भी देगा।
इसके साथ ही LNG और फ्यूल महंगे होने से सीमेंट, स्टील और टाइल्स बनाने वाली फैक्ट्रियों की लागत भी बढ़ गई है।
और फिर गुजरात के मोरबी जैसे इंडस्ट्रियल क्लस्टर में सिरेमिक यूनिट्स धीमी पड़ गई हैं।
फिर इससे बिल्डर्स के लिए प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ी है और कई प्रोजेक्ट्स में देरी भी हो रही है।
और फिर नतीजा यह कि घर बनाना महंगा भी होता जा रहा है और रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव भी बढ़ता दिख रहा है।
और फिर इतना ही नहीं LPG और अन्य ईंधन महंगे होने से किचन ऑपरेशन भी महंगे हो गए हैं।
और फिर कई रेस्टोरेंट्स ने मेन्यू के दाम भी बढ़ा दिए हैं या कुछ आइटम भी हटाने पड़े हैं। फिर इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर भी पड़ रहा है।
और फिर ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध का पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आपूर्ति पर गहरा असर भी पड़ा है।
साथ ही कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में बाधा आने के कारण भारत समेत दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में बदलाव भी देखा जा रहा है।
और फिर सरकार ने अब कीमतों पर काबू पाने के लिए एक्साइज ड्यूटी भी कम की है। फिर इससे सरकार खुद के राजस्व में घाटा झेल रही है ताकि आम आदमी पर जंग का बोझ और न बढ़े।