कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अब एलपीजी संकट को लेकर सरकार पर मुख्य सवाल उठाए हैं।
और फिर उन्होंने ये भी कहा है कि प्रवासी मज़दूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है।
और फिर इसके साथ ही राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर ये भी लिखा, मोदी जी ने कहा था कि एलपीजी गैस क्राइसिस को कोविड की तरह हैंडल भी करेंगे।
और फिर सच में वही किया बिल्कुल कोविड के जैसे ही- नीति शून्य, और घोषणा बड़ी और बोझ पड़ा ग़रीबों पर।
फिर उन्होंने आगे ये भी कहा, 500-800 रुपये की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मज़दूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर भी हो गई है।
रात को फिर घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं हैं। और फिर जिसका नतीजा ये हुआ कि शहर छोड़ो, गांव भी भागो।
इसके अलावा जो मज़दूर टेक्सटाइल मिल्स और फ़ैक्ट्रियों की रीढ़ हैं, आज वही टूट रहे हैं। और टेक्सटाइल सेक्टर पहले से आईसीयू में ही है।
और मैन्युफ़ैक्चरिंग लगातार दम तोड़ रही है। फिर यह संकट आया कहां से? कूटनीति की मेज़ पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार भी नहीं करती।
इसके साथ ही राहुल गांधी ने आगे कहा, जब अहंकार नीति बन जाए तो अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमराती है, मज़दूर लगातार पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे भी धकेल दिया जाता है।