योग गुरु रामदेव ने कहा है कि अगर आंदोलन में बच्चों को नहीं धकेलना चाहिए। फिर उनका कहना है कि बच्चे आंदोलन करेंगे तो पढ़ेंगे कब।
और साथ ही रामदेव ने रविवार को कहा कि वो शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन करते हैं, लेकिन अराजक आंदोलन का बिल्कुल भी नहीं।
फिर रामदेव ने मीडिया से बातचीत कहा, देश के बचपन ख़तरे में हैं। और इसलिए इस समय देश का सबसे बड़ा मुद्दा यही है। फिर कुछ लोग बचपन का इस्तेमाल आंदोलन में ही कर रहे हैं।
और उन्होंने कहा, यदि देश का बच्चा प्राइमरी स्कूल में पढ़ रहा है और आप उसको आंदोलन में धकेल देंगे, तो बच्चा फिर पढ़ेगा कब।
और उसको पता ही नहीं कि आंदोलन क्या होता है। लेकिन आपने उसको आंदोलन में धकेल दिया कि जाओ तुम भी थाने का घेराव भी करो।
फिर सड़कों पर उतर जाओ, डीएम-एडीएम का घेराव भी करो। और फिर छोटे बच्चों को आंदोलन में नहीं धकेलना चाहिए, ऐसा पूरी दुनिया में कहीं भी नहीं होता।
साथ ही देश में अराजक आंदोलन तो नहीं होना चाहिए, लेकिन संवैधानिक, लोकतांत्रिक और नैतिक मूल्यों पर आधारित आंदोलन भी होने चाहिए।
फिर आंदोलन के नाम पर अराजकता बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए। फिर देश की शिक्षा और चिकित्सा को लेकर गहरे प्रश्न हैं, उनका समाधान भी होना चाहिए।
रामदेव ने कहा, यह किसी एक व्यक्ति के सामर्थ्य की बात नहीं है कि वो देश की व्यवस्था बदल सके।
और इसके लिए तीन स्तर पर जागरूकता चाहिए। सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर की जागरूकता पूर्ण रूप से चाहिए।